छत्तीसगढ़ विधानसभा में सीएजी की रिपोर्ट प्रस्तुत, मार्च 2023 तक इन विभागों की कमियां उजागर

महालेखाकार एवं नियंत्रक की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में आवास, श्रमिक कल्याण और सौर पंप योजनाओं में खामियां उजागर


रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने छत्तीसगढ़ में शहरी आवास, श्रमिक कल्याण और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर कमियों की ओर संकेत किया है। यह निष्कर्ष मार्च 2023 को समाप्त अवधि के लिए जारी प्रदर्शन एवं अनुपालन लेखा परीक्षा (सिविल) रिपोर्ट में सामने आए हैं। यह रिपोर्ट भारत के संविधान के अनुच्छेद 151 के अंतर्गत तैयार की गई तथा 17 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत की गई।

“भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की प्रदर्शन एवं अनुपालन लेखा परीक्षा (सिविल) रिपोर्ट, मार्च 2023 तक की अवधि के लिए” शीर्षक वाली यह रिपोर्ट छत्तीसगढ़ सरकार से संबंधित है और इसे रिपोर्ट संख्या 06 वर्ष 2025 के रूप में प्रकाशित किया गया है। रिपोर्ट में तीन अध्याय शामिल हैं, जिनमें लेखा परीक्षा नियोजन एवं व्यय विश्लेषण, प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी का प्रदर्शन लेखा परीक्षण तथा श्रम विभाग द्वारा क्रियान्वित कल्याणकारी योजनाओं का अनुपालन लेखा परीक्षण शामिल है। इसके अतिरिक्त, छत्तीसगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी द्वारा सौर पंपों की स्थापना से संबंधित टिप्पणियां भी रिपोर्ट में दी गई हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी, जो भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा लागू की जाती है, के प्रदर्शन लेखा परीक्षण में लाभार्थियों के चयन और धन प्रबंधन में कई अनियमितताएं पाई गईं। बिलासपुर, रायपुर और कोरबा नगर निगम तथा प्रेमनगर नगर पंचायत सहित चार शहरी निकायों में की गई जांच में यह सामने आया कि ₹3 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले लाभार्थियों को भी योजना के तहत आवास आवंटित किए गए। भूमि स्वामित्व की पुष्टि किए बिना 250 लाभार्थियों को ₹4.05 करोड़ की सहायता राशि जारी की गई। शहरी और ग्रामीण आवास योजनाओं के प्रबंधन सूचना तंत्रों के आपसी एकीकरण के अभाव में लाभार्थियों द्वारा एक से अधिक योजनाओं का लाभ लेने के मामले भी सामने आए।

अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप घटक के अंतर्गत आवास इकाइयों के निर्माण में देरी के कारण ₹230.05 करोड़ की योजना राशि अवरुद्ध रही। लाभार्थियों से वसूली भी अपर्याप्त पाई गई। क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना के अंतर्गत प्रस्तुत दावों में से केवल सीमित संख्या में ही सब्सिडी स्वीकृत की गई, जबकि दोहरे लाभ के मामले भी सामने आए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य पूर्ण रूप से हासिल नहीं हो सके, क्योंकि केवल लगभग आधे आवास महिलाओं के नाम पर स्वीकृत किए गए। निगरानी व्यवस्था में भी कमियां पाई गईं, जिनमें जियो-टैगिंग में अनियमितताएं और सामाजिक अंकेक्षण में देरी शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग द्वारा क्रियान्वित कल्याणकारी योजनाओं के अनुपालन लेखा परीक्षण में निधियों के अपर्याप्त उपयोग और संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की सीमित कवरेज सामने आई। भारत सरकार के ई-श्रम पोर्टल पर बड़ी संख्या में श्रमिकों के पंजीकरण के बावजूद, राज्य के श्रम पोर्टल पर पंजीकरण अपेक्षाकृत कम पाया गया। रिपोर्ट में सूचना, शिक्षा एवं संचार गतिविधियों की कमजोरी, कई योजनाओं में असंगत व्यय और कुछ योजनाओं में वर्षों तक कोई व्यय न होने की बात भी उजागर हुई। साइकिलों की खरीद और वितरण में अनियमितताएं तथा विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता जारी करने में देरी भी पाई गई।

सौर सुजला योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी के माध्यम से स्थापित सौर पंपों के लेखा परीक्षण में यह पाया गया कि योजना दिशा-निर्देशों के विपरीत महंगे पंपों की स्थापना के कारण अनावश्यक अतिरिक्त व्यय हुआ। अनिवार्य उत्पादन परीक्षण किए बिना सौर पंप स्थापित किए गए और लेखा परीक्षा अवधि के दौरान ठेकेदारों के बिलों से श्रम उपकर की कटौती नहीं की गई। इन कमियों के परिणामस्वरूप राज्य को वित्तीय अनियमितताओं और अनावश्यक व्यय का सामना करना पड़ा।

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