नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए स्कूल और उच्च शिक्षा में हुई प्रगति का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्कूल शिक्षा प्रणालियों में से एक चला रहा है।
स्कूल शिक्षा में सुधार:
देश में 14.71 लाख स्कूलों में 24.69 करोड़ छात्र पढ़ रहे हैं और 1.01 करोड़ शिक्षक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। वर्ष 2030 तक प्री-प्राइमरी से माध्यमिक शिक्षा तक 100% सकल नामांकन अनुपात (GER) प्राप्त करने की योजना है। वर्तमान GER इस प्रकार है: प्राथमिक 90.9%, उच्च प्राथमिक 90.3%, माध्यमिक 78.7% और उच्च माध्यमिक 58.4%।
उच्च शिक्षा में विस्तार:
उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) की संख्या 51,534 (2014-15) से बढ़कर 70,018 (2025) हो गई। छात्र नामांकन 4.33 करोड़ से बढ़कर 4.46 करोड़ हो गया। भारत में अब 23 IITs, 21 IIMs और 20 AIIMS हैं, साथ ही जंजीबार और आबुधाबी में IIT के दो अंतरराष्ट्रीय परिसर भी शुरू किए गए हैं।
विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ ट्विनिंग और ड्यूअल डिग्री कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं, जबकि 15 विदेशी उच्च शिक्षा संस्थानों के भारत में परिसर खोलने की संभावना है।
कौशल और रोजगार:
माध्यमिक स्कूलों में कौशल निर्माण की व्यवस्था शुरू की गई है। 14-18 वर्ष आयु वर्ग के केवल 0.97% युवाओं को संस्थागत प्रशिक्षण मिला है। शिक्षा में कौशल वृद्धि युवाओं को रोजगार योग्य बनाएगी और स्कूल छोड़ने वालों की संख्या कम करेगी।
सरकारी पहलें:
13,076 PM-SHRI स्कूल स्थापित किए गए, 2,99,544 स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ ECCE प्रणाली मजबूत की गई। जादुई पिटारा, ई-जादुई पिटारा, किताब एक पढ़े अनेक और भारतीय भाषा पुस्तक योजनाओं के जरिए बच्चों को स्थानीय भाषा में शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई गई।
वित्त मंत्री ने कहा कि NEP के 5+3+3+4 ढांचे के तहत प्रारंभिक शिक्षा, आधारभूत साक्षरता, माध्यमिक शिक्षा और डिजिटल-व्यावसायिक कौशल का समन्वय आवश्यक है।

