श्रीराम मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में महाभारत युद्ध का किया वर्णन, आज कृष्ण_राम के एक साथ दर्शन होंगे
रायपुर. श्रीराम मंदिर परिसर, वीआईपी रोड पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य हिमांशु कृष्ण भारद्वाज महाराज ने महाभारत के युद्ध प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने द्रौपदी चीरहरण, भगवान श्री कृष्ण के शांतिदूत रूप के में हस्तिनापुर गमन और दुर्योधन अप्रिय वचन की चर्चा करते हुए कहा कि महाराज धृतराष्ट्र अंधे थे और उनका विचार कलुषित था तथा पुत्र मोह से पीड़ित थे। महाभारत युद्ध के अनेक कारण थे, जिसमें प्रमुख द्रौपदी का अपमान, धृतराष्ट्र का मोह और दुर्योधन की भूल को प्रमुख माना जाता है। महाराजश्री कथा को आधुनिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि व्यक्ति जीवन में सुख-सुविधा और उत्तम संतान की कामना से सदैव प्रेरित रहता है। और अपने बच्चों की भविष्य की चिंता करता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को उत्तम संस्कार देते हुए उनके चरित्र का निर्माण करे तो बच्चे का भविष्य स्वमेव सुधर जाएगा।
आचार्य श्री हिमांशु जी ने कहा कि राज्य मिलने के बाद भी पांडवों ने शकुनी मामा के षड्यंत्र का शिकार हुए जुआ खेलने पर लगे। भगवान श्री कृष्ण से इसके लिए पांडवों को मना किया था फिर पांडव दुर्भाग्य से प्रेरित होकर जुआ खेलने लगे। जिसका भीषण परिणाम कौरवों की सभा द्रौपदी के चीरहरण के रूप में सामने आया। महान योद्धा होते हुए भी पांडव द्रौपदी की रक्षा नहीं कर सके। भीषम पितामह, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य से तेजस्वी व्यक्तियों ने धृतराष्ट्र के कुशासन और दुर्योधन के धृष्टा का विरोध नहीं किया। जुए में हार के परिणाम स्वरूप पांडवों को दो वर्ष का अज्ञातवास भोगना पड़ा। पर दुर्योधन से जुए की शर्त नहीं मानी और पांडवों को राज्य से वंचित होना पड़ा। भगवान कृष्ण का शान्ति प्रस्ताव को कौरवों ने ठुकरा दिया और पांडवों को पांच गांव भी नहीं मिलने पर युद्ध सुनिशिचत हो गया। अंतत: महाभारत का भीषण संग्राम हुआ, लाखों योद्धाओं की मौत हुई और जीवन ऐसी विभीषका फैली से लोग त्राहि-त्राहि करने लगे। उन्होंने बताया कि अंतत: पांडवों का प्रपौत्र परीक्षित कुरुवंश के राज हुए और उन्हें सात दिनों में मृत्यु का शाप लगा जिसके निराकरण के लिए उन्होंने नारदीजी की प्रेरण से व्यासनंदन शुकजी से भागवत की कथा सुनी और उन्हें जन्म और मृत्यु के राहस्य की जानकारी मिली। उन्होंन कलयुग के प्रभाव और महत्ता का वर्णन किया और कहा सदचारी को कलयुग कभी प्रभावित नहीं करता है। कलयुग सदा दुचारियों के बीच पाया जाता है। इसलिए कलयुग में जीवन और परिवार को सुखमय बनाना हो उत्तम संतान की कामना हो तो बच्चों को संस्कार और उत्तम चरित्र के निर्माण की प्रेरणा दे तभी जीवन सुखमय बनेगा।
महाराज श्री ने कहा कि भगवान श्री राम के चरित्र को अपना व्यक्ति जीवन और परिवार में सुख-शांति ला सकता है। किन्तु यदि समाज और राष्ट्र को संवारने की बात आए तो हमें भगवान कृष्णा के गुणा समझना होगा, अपनाना होगा। संगीतमय भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
आज की कथा श्रवण का लाभ राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक सुनील सोनी के परिवार ने लिया। बुधवार की कथा में राजेन्द्रजी के अलावा सुनील अग्रवाल, कैलाश मोरारका, विवेक अग्रवाल, पुरुषोत्तम सिंघानिया, कैलाश अग्रवाल, संजय अग्रवाल परिवार सहित शामिल हुए। इसी तरह राम अवतार भोग परिवार, रवीन्द्रजी, भारवी, पार्षद अनामिकाजी, ललित सिंघानिया, पुष्पेंद्र उपाध्याय, सुरजीत छाबड़ा,विनोद अग्रवाल, शैलेष अग्रवाल, वीरेंद्र गोयल, पवन अग्रवाल (पाइप इस्पात), हर्षित सिंघानिया, हनुमंतजी, बृजलाल गोयल और गोविंद अग्रवाल, प्रकाश अग्रवाल, नरेश केडिया, श्रीमती नवल अग्रवाल, माया मोरारका, रचन बृज अग्रवाल, संजय अग्रवाल (खरसियावाले), विजय अग्रवाल रासगरबावाले, जगदीश अग्रवाल (हीरा ग्रुप) और कैलाश अग्रवाल (भिलाईवाले) का कथा में विशेष योगदान रहा।
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