नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में आज महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए गए। इन विधेयकों के तहत 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस महत्वपूर्ण कदम का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को और बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर सदन में बोलते हुए सभी राज्यों को यह भरोसा दिलाया कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी का बयान: “कोई भेदभाव नहीं होगा”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि भारत का संविधान किसी को भी टुकड़ों में सोचने का अधिकार नहीं देता। उन्होंने बताया कि यह एक राष्ट्र के रूप में एकजुट होकर सोचने और निर्णय लेने का समय है। मोदी ने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि राजनीति से परे इस मुद्दे को देखा जाए और इसे देश के सामूहिक हित में ही साकार किया जाए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन की प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। चाहे वह छोटे राज्य हों या बड़े, उत्तर हो या दक्षिण, सभी को समान अवसर मिलेगा।
‘अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा’
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हमने संविधान विशेषज्ञों और एक्टिविस्टों से इस मुद्दे पर गहरी चर्चा की है। जो परिसीमन पिछले कालखंडों में हुआ, वह अनुपात आज भी बने रहेंगे। किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।” उन्होंने अपने वादे को दोहराते हुए कहा, “मैं गारंटी देता हूं कि इस निर्णय से किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। जब नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की आवश्यकता नहीं है।”
‘यह नारी का हक है’
प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण पर अपनी बात रखते हुए कहा, “हम भ्रम में न रहें, हम इस अहंकार में न रहें कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं। यह उसका हक है।” उन्होंने कहा कि लंबे समय से महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व से वंचित रखा गया, और अब यह बदलाव समाज के लिए एक ज़रूरी कदम है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनीति के तराजू से न तौला जाए। “हम जब भी कोई निर्णय लेते हैं, तो उस निर्णय का आधा जिम्मा सभी के ऊपर होता है।”
महिला आरक्षण विधेयक का महत्व
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाना है। इसके तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलने से उन्हें राजनीति में अधिक भागीदारी का अवसर मिलेगा, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को और सशक्त करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है और इसे राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए।

