बस्तर में तय तिथि से पहले: 25 लाख का इनामी कमांडर पापाराव का आत्मसमर्पण, 17 नक्सली भी साथ


बीजापुर/बस्तर, छत्तीसगढ़ | 25 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से माओवादी संगठन के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के घने जंगलों से मंगलवार को सामने आई तस्वीरें बस्तर के इतिहास की दिशा बदलने वाली मानी जा रही हैं। पश्चिम बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) का प्रभावशाली सदस्य, 25 लाख रुपये का इनामी शीर्ष माओवादी कमांडर पापाराव अब आत्मसमर्पण के लिए सामने आ चुका है।
17 माओवादी भी करेंगे सरेंडर, 7 महिलाएं शामिल
पापाराव के साथ डीकेएसजेडसी सदस्य और डिविजनल कमेटी के सदस्य (DVCM) प्रकाश माड़वी, अनिल ताती समेत कुल 17 माओवादी भी हथियारों के साथ आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में हैं। इनमें सात महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो संगठन के कमजोर पड़ने का बड़ा संकेत है।
35 साल से सक्रिय था पापाराव
सुकमा जिले के नीलामड़गू गांव का निवासी पापाराव पिछले 35 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय रहा है। राज्य में शीर्ष माओवादी नेतृत्व के लगातार खत्म होने के बाद वह डीकेएसजेडसी स्तर का आखिरी बड़ा कमांडर माना जा रहा था। उसके आत्मसमर्पण के साथ ही छत्तीसगढ़ में सशस्त्र माओवाद के नेतृत्व का अंत लगभग तय माना जा रहा है।
यूट्यूबर पत्रकार के जरिए सामने आई पहली तस्वीर
मंगलवार सुबह बस्तर के यूट्यूबर पत्रकार रानू तिवारी के साथ इंद्रावती क्षेत्र से पापाराव और अन्य माओवादियों की पहली तस्वीर सामने आई। रानू तिवारी के अनुसार, सभी माओवादी आत्मसमर्पण के लिए जंगल से निकल चुके हैं और उन्हें सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बलों की टीम रवाना कर दी गई है।
बीजापुर में सुरक्षित, आज करेंगे आधिकारिक सरेंडर
सूत्रों के मुताबिक, सभी माओवादी मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे बीजापुर जिले के कुटरू थाने पहुंच चुके थे। फिलहाल उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। बुधवार को वे बस्तर आईजी सुंदरराज पी. के समक्ष औपचारिक आत्मसमर्पण करेंगे।
माओवादी संगठन अपने अंतिम चरण में
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि बस्तर में माओवादी संगठन अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। विज्जा हेमला और सोढ़ी केशा जैसे कुछ नाम भले ही शेष हों, लेकिन उनकी सक्रियता भी लगभग खत्म हो चुकी है। अधिकतर कैडर या तो दूसरे राज्यों में भाग चुके हैं या हथियार छोड़कर गांव लौट आए हैं।
बड़े कमांडरों के मारे जाने से टूटा नेटवर्क
पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति और मजबूत इंटेलिजेंस के चलते माओवादियों की कमर टूट चुकी है। बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा, सुधाकर और चलपति जैसे बड़े कमांडरों के मारे जाने से संगठन बिखर गया है।
31 मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने का लक्ष्य
सरकार ने देश में माओवादी हिंसा के समूल उन्मूलन के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में माओवादी गतिविधियां लगभग समाप्ति की ओर हैं।

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