वैश्विक बन्धुत्व का प्रारब्ध परिवार से ही होता है: राज्यपाल

RAJYPAL PROGRAMM

रायपुर। दुर्गा महाविद्यालय को शक्ति दायक शैक्षणिक व्यवस्था निरूपित करते हुए बन्धुत्व का विकास अच्छी दोस्ती , मित्रवत व्यवहार सदाचार का प्रारम्भ स्वयं के घर से ही होता है ऐसी भावना युवा श्रोताओं को महामहिम ने दी । युवाओं को आत्मीय वातावरण निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका को बताते हुए कहा कि घरों में विभिन्न कमरे और मोबाइल्स की व्यस्तता को जिम्मेवार ठहराया । अपनी भूमिका को ग़रीब परिवारों को साथ में भोजन हेतु प्रोत्साहन और इस प्रयोजन हेतु निश्चित सहयोग को साझा भी किया ।
समाज में बुजुर्ग और वरिष्ठ जनों का सम्मान निरन्तर होता रहे यह ध्यान भी रखना चाहिए यह युवाओं को संदेश भी दिया। अच्छी संगत का निर्माण और उसके साथ विवेकानन्द जी के विचारों के साथ स्वयं की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करने की राय दी। इस दृष्टिकोण से युवाओं को किसी भी तरह की टॉक्सिक फ्रेंडशिप से बचने की भी सलाह दी ।

कार्यक्रम के संचालन में संगठनात्मक परिष्कृत आचरण का भाव कार्यक्रम के प्रारम्भ होने के पूर्व तथा प्रारम्भिक चरणों में प्रदर्शित हुआ । जिसमें सुखद अभिव्यक्ति की तालियों के बदले “ओम” स्वर से करने का प्रशिक्षण के साथ भारतमाता की जयघोष, देशभक्ति गीतों की श्रृंखला युवाओं में स्फूर्ति दायक रही । इस कार्य को निष्पादित किया कार्यक्रम की मंच संचालिका श्रीमती शजिन्ता दीदी ने । कार्यक्रम में केन्द्र के संरक्षक आत्मबोध अग्रवाल, प्रान्त संगठक ऋतुमणि दीदी, प्रो अजय शर्मा एवं विमर्श प्रमुख सुयश शुक्ल जी ने राज्यपाल महोदय का स्वागत किया।

“शिकागो धर्मसभा के सामरिक सन्देश” को युवा ललक ही 2047 के भारत के रूप में फ़लीभूत करेगा: राकेश चतुर्वेदी

अपने सारगर्भित उद्बोधन में उन्होंने विवेकानन्द जी के धर्मसभा के पूर्व उस सम्मेलन में प्रतिभागी बन पाने के संघर्षों के तथ्य कि व्याख्या की । जिसके चलते आव्हान में स्वामी जी की ओजस्विता को आधार मानकर भविष्य का भारत गढ़ने की चुनौती ले कर उद्यमिता करने विकसित भारत की रचना गढ़ने में युवा श्रोताओं को कर्मशील बनने का सन्देश दिया है ।
संजीव गुप्ता जी ने अपने विचार उद्धरण के साथ रखे । बन्धुत्व के प्रारंभ को स्वगृह से हो सकती है । इसे जोड़ते हुए कृष्ण जी की महाभारत युद्ध पूर्व भूमिका और पाँच गाँव ना देने की परिणति को उद्धृत किया ।
महानगर संचालक चेतन तरवानी जी ने आभार प्रदर्शन, अल्पना मोहदीवाले जी ने ओंकार प्रार्थना,गीत निर्जला दीदी, विवेक वाणी मीना दीदी, शांति मंत्र मनीषा गर्ग दीदी द्वारा किया गया । कार्यक्रम का संचालन शजिंता शुक्ला दीदी ने किया।

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