फर्जी दस्तावेजों के सहारे कराई गई शादी, POCSO समेत कई धाराओं में FIR दर्ज, 22 अप्रैल को डीजीपी तलब
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर चर्चित ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा भोंसले का मामला अब गंभीर कानूनी विवाद में बदल गया है। 72 घंटे की गहन जांच के बाद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनमें उसकी उम्र, शादी और दस्तावेजों से जुड़ी बड़ी गड़बड़ियां उजागर हुई हैं।
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच में खुलासा हुआ है कि मोनालिसा भोंसले पारधी जनजाति समुदाय से संबंधित एक नाबालिग लड़की है। आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में हुई इस जांच ने पूरे मामले को साजिश की शक्ल में सामने ला दिया।
क्या है पूरा मामला?
अधिवक्ता प्रथम दुबे द्वारा उठाए गए सवालों के बाद जब मामले की जांच शुरू हुई, तो कई अहम तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि मोनालिसा की शादी के लिए उसकी उम्र छुपाई गई और फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।
केरल में मंदिर और पंचायत स्तर पर हुए शादी पंजीकरण के लिए आधार कार्ड में दर्ज गलत उम्र का इस्तेमाल किया गया। जबकि मध्य प्रदेश के महेश्वर स्थित सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में उसकी वास्तविक जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 दर्ज है।
इस आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि शादी के समय उसकी उम्र मात्र 16 वर्ष थी, जो भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध है।
72 घंटे में खुली साजिश की परतें
जांच टीम ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश तक दस्तावेजों की कड़ी जांच की। महज 72 घंटे के भीतर पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र की पहचान की गई।
नगर परिषद द्वारा जारी इस फर्जी प्रमाण पत्र को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
फरमान खान पर कानूनी शिकंजा
मामले के सामने आने के बाद फरमान खान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मध्य प्रदेश पुलिस ने उसके खिलाफ POCSO एक्ट, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
पुलिस अब इस मामले में अन्य संभावित आरोपियों और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। साथ ही कुछ राजनीतिक संगठनों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आयोग का सख्त रुख
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 22 अप्रैल 2026 को केरल और मध्य प्रदेश के डीजीपी को तलब किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

