छत्तीसगढ़ में 6 नए मेडिकल कॉलेज खुलेंगे, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर CM साय का जोर

जिला अस्पतालों से PHC तक दवाइयां और जांच सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश, दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंचने पर बनेगी वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा की। मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समय पर बेहतर उपचार, आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

प्रदेश में 6 नए मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी शिक्षा का भी विस्तार

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में छह नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और छह निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं।

मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त फैकल्टी, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ संबंधित क्षेत्रों में बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के महत्वपूर्ण केंद्र भी हैं।

बैठक में जानकारी दी गई कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या आठ से बढ़कर 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर सात हो गई है। इसके अलावा एलाइड हेल्थ के 11 पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, जिनके लिए 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है।

1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य संस्थानों में जांच सुविधाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए कहा कि संसाधनों का लाभ सीधे मरीजों तक पहुंचना चाहिए। उपकरणों के रखरखाव या मरम्मत के अभाव में कोई महत्वपूर्ण मशीन लंबे समय तक बंद नहीं रहनी चाहिए।

अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है, जबकि 25 नए डायलिसिस केंद्र प्रारंभ किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया तेज करने तथा जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश भी दिए।

सुरक्षित प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रत्येक प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें, इसके लिए गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, पोषण, चिकित्सा देखभाल और संस्थागत प्रसव की सुविधाएं मजबूत की जाएं।

उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में टीकाकरण, मलेरिया नियंत्रण, टीबी उन्मूलन और कुष्ठ रोग निवारण कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।

दुर्गम क्षेत्रों में एम्बुलेंस नहीं पहुंची तो अपनाएं वैकल्पिक व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने 108 संजीवनी एक्सप्रेस और 102 महतारी एक्सप्रेस सेवाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि आपात स्थिति में मरीजों तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचना जरूरी है। जिन वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जाए।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अंतर्गत 375 एम्बुलेंस और 102 महतारी एक्सप्रेस के अंतर्गत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 तक महतारी एक्सप्रेस सेवा से दो लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने शव वाहन सेवाओं को भी सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी परिजन की मृत्यु के बाद शोकाकुल परिवार को शव वाहन के लिए परेशान न होना पड़े। ऐसी सुविधाएं संवेदनशीलता और सम्मान के साथ समय पर उपलब्ध कराई जाएं।

सिकल सेल और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का होगा विस्तार

मुख्यमंत्री ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच, उपचार और आनुवंशिक परामर्श के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाएं मजबूत करने पर जोर दिया।

उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए आम नागरिकों तक परामर्श और उपचार सुविधाओं की जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता जताई। बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की भी समीक्षा की गई।

त्योहारी सीजन में मिलावट पर सख्ती, खाद्य पदार्थों की होगी जांच

मुख्यमंत्री ने आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को मिठाई, दुग्ध उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों की सघन जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री स्थलों की नियमित जांच हो तथा मिलावट या अमानक खाद्य सामग्री मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया सहित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *