नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उभरती विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Emerging Science and Technology) के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनाने का आह्वान किया है। एक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल दूसरे देशों की तकनीकों को अपनाना नहीं, बल्कि नई तकनीकों का विकास करना, उनकी दिशा तय करना और दुनिया की समस्याओं का समाधान देना है।
प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, जैव प्रौद्योगिकी और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक की वास्तविक सफलता तब है, जब उसका लाभ प्रयोगशालाओं से निकलकर आम नागरिकों तक पहुंचे।
भारत अब तकनीक अपनाने वाला नहीं, तकनीक बनाने वाला देश बन रहा है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले भारत को दुनिया में विकसित होने वाली तकनीकों को अपनाने के लिए इंतजार करना पड़ता था। अब देश नई सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भारत में वैक्सीन के विकास, बड़े स्तर पर टीकाकरण और दूसरे देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का उदाहरण दिया। साथ ही मंगल मिशन और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र तक पहुंचने की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए भारतीय वैज्ञानिकों की क्षमता पर भरोसा जताया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत को भविष्य की तकनीकों में साहसिक नवाचार करते हुए वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए।
परमाणु ऊर्जा में आत्मनिर्भरता पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता होगी। परमाणु ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने भारत की फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में हुई प्रगति का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री के संबोधन के अनुसार, देश का 500 मेगावाट क्षमता वाला प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर फर्स्ट क्रिटिकलिटी के चरण तक पहुंच चुका है।
यह उपलब्धि भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा क्षमता और रणनीतिक तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्पेस टेक्नोलॉजी और भारतीय स्टार्टअप्स की बढ़ती ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और निजी कंपनियों तथा स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ रही है।
उन्होंने स्वदेशी रॉकेट के जरिए उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने और सैटेलाइट डॉकिंग क्षमता हासिल करने जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, अंतरिक्ष विज्ञान में भारतीय युवाओं और उद्यमियों की भागीदारी देश के नवाचार तंत्र को नई ताकत दे रही है।

AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की नई पहल
प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट, स्वदेशी AI मॉडल और भारत में निर्मित चिप्स की आपूर्ति शुरू होने का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि बैटरी स्टोरेज के क्षेत्र में भी देश में उपलब्ध कच्चे माल पर आधारित क्षमता विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, परमाणु ऊर्जा से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान और AI से लेकर सेमीकंडक्टर तक, भारत का उद्देश्य महत्वपूर्ण तकनीकों में अपनी क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ाना है।
विज्ञान का उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए
प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी को केवल हथियार या रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। इनका प्रमुख उद्देश्य मानवता की सेवा और आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए।
उन्होंने ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि वह कितनी बड़ी समस्या का समाधान करती है और कितने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है।
प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, रोजगार और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में तकनीकी समाधानों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने भारतीय स्टार्टअप्स द्वारा विकसित की जा रही ब्रेन एक्टिविटी की निगरानी करने वाली वियरेबल EEG तकनीक, वायरलेस एवं सैटेलाइट कम्युनिकेशन, विशेष पोषण उत्पादों और औद्योगिक कचरे के उपयोग से संबंधित समाधानों का भी उल्लेख किया।
IIT मद्रास के ब्रेन सेंटर की सराहना
प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के आधुनिक ब्रेन सेंटर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां विकसित ब्रेन इमेजिंग टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।
इस प्रकार की तकनीक मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों की जटिलताओं को समझने और उनके समाधान खोजने में मदद कर सकती है।
प्रधानमंत्री ने विज्ञान और तकनीक की प्रगति को समाज के परिवर्तन और नागरिकों के जीवन में सुधार से जोड़ने पर बल दिया।
अनुसंधान और विकास के लिए 24,000 करोड़ रुपये की नई प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मोदी ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अनुसंधान, विकास और नवाचार के लिए एक लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था के संकल्प तथा अनुसंधान तंत्र को मजबूत करने के प्रयासों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री के संबोधन के अनुसार, पिछले एक वर्ष में ऐसी तकनीकों के लिए लगभग 12,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई गई है, जो प्रयोगशालाओं से निकलकर बाजार तक पहुंचने के लिए तैयार हैं। निजी क्षेत्र भी लगभग 12,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है।
इस तरह अनुसंधान एवं विकास के लिए कुल 24,000 करोड़ रुपये की नई प्रतिबद्धता का उल्लेख किया गया।
उन्होंने पेटेंट आवेदनों में वृद्धि को भी भारत में अनुसंधान और नवाचार की मजबूत होती संस्कृति का संकेत बताया। उनके अनुसार, लगभग एक दशक पहले सालाना पेटेंट आवेदन 50,000 से कम थे, जबकि पिछले वर्ष इनकी संख्या करीब 1.5 लाख तक पहुंच गई।
AI के दौर में वैज्ञानिक सोच और स्वतंत्र निर्णय जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अनुसंधान की उत्पादकता बढ़ा सकता है और कई नियमित कार्यों को तेजी से पूरा कर सकता है। हालांकि, AI का उपयोग वैज्ञानिकों की स्वतंत्र सोच और निर्णय क्षमता को सीमित करने के बजाय उसे मजबूत बनाने के लिए होना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि AI तेजी से उत्तर दे सकता है, लेकिन उन उत्तरों की सत्यता परखने की जिम्मेदारी वैज्ञानिकों की ही होगी।
प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों से असफलताओं से सीखने, नए प्रयोग करने और स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाने की परंपरा बनाए रखने का आह्वान किया।
क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियां
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा और अगली पीढ़ी के संचार को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया।
उन्होंने कहा कि AI, सिंथेटिक बायोलॉजी और ऑटोनॉमस सिस्टम जैसी तकनीकों में सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
साइबर हमलों और डिजिटल खतरों के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए उन्होंने AI आधारित तथा क्वांटम सुरक्षा समाधानों के विकास पर जोर दिया। इन समाधानों से वित्तीय नेटवर्क और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण तंत्रों को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिल सकती है।
वैज्ञानिकों और युवाओं को तीन साल का लक्ष्य तय करने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, स्टार्टअप संस्थापकों और विद्यार्थियों से अगले तीन वर्षों के लिए ठोस लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रतिभागी को यह तय करना चाहिए कि वह आने वाले तीन वर्षों में कौन-सी तकनीक, प्रोटोटाइप, पायलट प्रोजेक्ट या उत्पाद विकसित करने में योगदान देगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कॉन्क्लेव केवल विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे मापे जा सकने वाले परिणाम भी सामने आने चाहिए।
विकसित भारत के लिए नवाचार और अनुसंधान महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास युवा प्रतिभा, वैज्ञानिक क्षमता और कुछ नया करने का संकल्प है। आवश्यकता है कि इन क्षमताओं को भविष्य की तकनीकों के विकास और वैश्विक समस्याओं के समाधान में लगाया जाए।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारत उभरती विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में केवल भागीदार नहीं रहेगा, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी आत्मनिर्भरता और विज्ञान के सामाजिक उपयोग को मजबूत करना आवश्यक है।

