महतारी वंदन योजना से 68 लाख महिलाओं को मिल रही आर्थिक सहायता, छत्तीसगढ़ में 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार माताओं-बहनों के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। महिलाओं की प्रगति केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रदेश के विकास का आधार है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री श्री साय 17 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में आयोजित विभिन्न गरबा एवं नवरात्रि महोत्सवों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं और माता रानी से सभी के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कालीबाड़ी स्थित मां काली मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद वे मंडी परिसर में श्री कच्छ कड़वा पाटीदार समाज के नवरात्रि महोत्सव, भानपुरी में गरबा समारोह, गोवर्धन नगर में श्री कच्छ गुर्जर क्षत्रिय समाज के नवरात्रि महोत्सव और अमलीडीह में आयोजित ढोलिडा रास गरबा-2026 में शामिल हुए।
गरबा आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की सुंदर अभिव्यक्ति है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक है। विभिन्न समाजों और समुदायों के लोग जब मिलकर उत्सव मनाते हैं, तो आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि का पर्व हमें साहस, संयम, सकारात्मकता और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। गरबा महोत्सवों में महिलाओं और बेटियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी भारतीय संस्कृति की जीवंतता को दर्शाती है। यह पर्व नारी शक्ति के सम्मान के साथ उनके प्रति अपने दायित्वों का भी स्मरण कराता है।
महतारी वंदन योजना से 68 लाख महिलाओं को लाभ
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों के बैंक खातों में हर महीने एक हजार रुपये की सहायता राशि सीधे अंतरित की जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की स्वतंत्रता को भी मजबूत कर रही है। महिलाएं इस राशि का उपयोग दैनिक जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और बचत जैसे कार्यों में कर रही हैं। महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है।
छत्तीसगढ़ की 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह उपलब्धि महिलाओं की मेहनत, लगन, उद्यमशीलता और आर्थिक सामर्थ्य का प्रमाण है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार और उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता से परिवारों में खुशहाली आती है और बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
शक्ति आराधना की समृद्ध परंपरा का केंद्र है छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता कौशल्या की पावन धरती छत्तीसगढ़ में शक्ति उपासना की समृद्ध परंपरा रही है। मां दंतेश्वरी, मां बम्लेश्वरी, मां महामाया और मां चंद्रहासिनी जैसे प्रमुख देवी शक्तिपीठ प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के अमूल्य प्रतीक हैं।
नवरात्रि के दौरान दंतेवाड़ा, डोंगरगढ़, रतनपुर और चंद्रपुर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। गांवों और शहरों में ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जाते हैं और पूरा प्रदेश भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयासरत है।
‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा प्रदेश
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी आधुनिक विकास के साथ अपनी संस्कृति, आस्था और परंपराओं को सहेजने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक विरासत अतीत की स्मृति ही नहीं, बल्कि वर्तमान की शक्ति और भविष्य की प्रेरणा भी है। नवरात्रि और गरबा जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, देवजी भाई पटेल, जयंती पटेल, जगदीश पटेल सहित विभिन्न समाजों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

