- लेखकः एल.डी. मानिकपुरी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय तक ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है। खेतों में लहलहाती फसलें प्रदेश की समृद्धि की कहानी कहती हैं, लेकिन बदलते समय के साथ छत्तीसगढ़ ने विकास की यात्रा में नए आयाम जोड़े हैं। अब कृषि के साथ उद्योग, तकनीक के साथ कौशल और रोजगार के साथ उद्यमिता भी प्रदेश की नई पहचान बन रही है। इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत प्रदेश के युवा और अनुभवी मानव संसाधन हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद के हालिया निर्णय इसी सोच को आगे बढ़ाते दिखाई देते हैं। एक ओर नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना से युवाओं को आधुनिक और रोजगारपरक कौशल का मंच मिलेगा, वहीं दूसरी ओर विभिन्न शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष किया जाना अनुभव और क्षमता को नए अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सपनों को डिग्री के साथ हुनर भी चाहिए
आज का युवा केवल शिक्षा नहीं, बल्कि रोजगारपरक कौशल भी चाहता है। उद्योगों की बदलती जरूरतों के बीच ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ग्राम तेंदुवा में NSTI की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रावास सुविधाएं होंगी। यहां दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों में हर वर्ष करीब 1,000 प्रशिक्षुओं तथा अल्पकालीन कार्यक्रमों में लगभग 3,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।
यह हजारों युवाओं के सपनों से जुड़ा बड़ा अवसर है। कोई तकनीकी कौशल हासिल करेगा, कोई उद्योग से जुड़ेगा, तो कोई अपना उद्यम शुरू कर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
कौशल से रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह
NSTI की स्थापना से युवाओं को प्रशिक्षण के साथ बदलती तकनीक और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी। आज कौशल केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की क्षमता भी है।
गांव और कस्बों के युवाओं को भी आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और उद्यमशीलता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। एक प्रशिक्षित युवा नौकरी तलाशने वाला बनने के साथ-साथ नौकरी देने वाला उद्यमी भी बन सकता है। यही कौशल से उद्यमिता और रोजगार से आत्मनिर्भरता की यात्रा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी युवाओं को रोजगार पाने के साथ रोजगार देने वाला बनने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। NSTI जैसे संस्थान इस सोच को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उम्र बढ़ी तो अवसरों का दायरा भी बढ़ा
अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष करने का निर्णय उन लोगों के लिए नई संभावनाएं लेकर आया है, जिनके पास अनुभव, कार्यकुशलता और जिम्मेदारियों का व्यावहारिक ज्ञान है।
उम्र बढ़ने के साथ अनुभव भी बढ़ता है और अनुभव किसी भी व्यवस्था की महत्वपूर्ण पूंजी है। वर्षों तक काम कर चुके लोगों ने व्यवस्था को करीब से समझा है और अलग-अलग परिस्थितियों और चुनौतियों का सामना किया है। ऐसे अनुभव का बेहतर उपयोग नई जिम्मेदारियों में किया जाना संस्थाओं को अधिक सक्षम और प्रभावी बना सकता है।
युवा ऊर्जा और अनुभवी हाथ साथ चलें
विकास की मजबूत तस्वीर तब बनती है, जब युवा ऊर्जा और अनुभवी सोच साथ आती है। युवा नई तकनीक, नए विचार और नई कार्यशैली लेकर आते हैं, जबकि अनुभवी वर्ग व्यावहारिक समझ और परिस्थितियों से निपटने का अनुभव प्रदान करता है।
एक ओर NSTI युवाओं के हुनर को मंच देगा, तो दूसरी ओर आयु सीमा में वृद्धि अनुभवी वर्ग की क्षमता को नए अवसर देगी। दोनों निर्णय मिलकर छत्तीसगढ़ की मानव पूंजी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।
हुनर, अनुभव और अवसर से बनेगा नया छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ का भविष्य केवल उसकी प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि उसके लोगों की क्षमता से भी तय होगा। जब हुनर को मंच, अनुभव को अवसर और सपनों को सही दिशा मिलेगी, तब विकास आंकड़ों से निकलकर लोगों की जिंदगी में दिखाई देगा।
यही नए छत्तीसगढ़ की तस्वीर है—जहां कौशल से रोजगार, अनुभव से अवसर और अवसर से आत्मनिर्भरता की राह तैयार हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लिए जा रहे ऐसे निर्णय प्रदेश के युवाओं और अनुभवी मानव संसाधन की क्षमता को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

