छत्तीसगढ़ में नीतिगत बदलावों से विकास को मिली नई रफ्तार

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किसानों, महिलाओं, गरीबों और युवाओं से लेकर उद्योग, शिक्षा, बस्तर और सुशासन तक दिख रहा बड़े फैसलों का असर
  • धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

छत्तीसगढ़ सरकार के बड़े नीतिगत सुधारों और जनकल्याणकारी फैसलों ने राज्य के विकास को नई दिशा दी है। प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन, बुनियादी ढांचे और जनकल्याण के क्षेत्र में लिए गए फैसलों का असर अब प्रदेश के विभिन्न वर्गों तक दिखाई देने लगा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के ढाई वर्ष से अधिक का कार्यकाल केवल योजनाओं और घोषणाओं को जमीन पर उतारने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस दौरान कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिनका दीर्घकालिक असर राज्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास पर पड़ने की उम्मीद है। सरकार ने गरीबों, किसानों और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को गति देने के साथ उद्योग, शिक्षा, खनिज, डिजिटल गवर्नेंस और बस्तर के विकास के लिए भी नीतिगत बदलावों पर जोर दिया है।

पहली कैबिनेट में 18 लाख से अधिक आवासों का फैसला

सरकार बनने के बाद लिए गए प्रमुख फैसलों में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर किया गया निर्णय महत्वपूर्ण रहा। पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख से अधिक जरूरतमंद परिवारों के आवास की स्वीकृति देने का निर्णय लिया गया।

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। पुराने और नए स्वीकृत आवासों को मिलाकर ढाई वर्षों में 11 लाख से अधिक घर हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं।

इस पहल से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्के आवास का सहारा मिला है और सरकार की आवास नीति का फोकस अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने पर रहा है।

धान खरीदी बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत

छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में धान की भूमिका को मजबूत करते हुए किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान बेचने की सुविधा दी गई।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को करीब 43,723 करोड़ रुपये की राशि दी गई।

धान खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे तकनीकी सुधारों ने प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने में मदद की है।

महिला सशक्तिकरण को मिली नई ताकत

महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। महतारी वंदन योजना के तहत 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।

प्रदेश में अब तक 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। वहीं बिहान मिशन के तहत प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं।

महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और संपत्ति में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत भी दी गई है।

बस्तर में सुरक्षा के साथ विकास की नई रणनीति

बस्तर में बदलाव सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। दशकों से नक्सलवाद क्षेत्र के विकास में बड़ी चुनौती रहा है। सरकार ने सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया है।

‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्तर मुन्ने अभियान’ के जरिए विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे सुदूर क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है।

बस्तर के करीब 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से 4,824 करोड़ रुपये की ‘आजीविका उन्नयन योजना’ तैयार की गई है।

दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा कैंप अब स्थानीय लोगों के लिए सेवा और विकास के केंद्र के रूप में भी काम कर रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन की सुविधा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा शुरू की गई है।

सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है।

सरकार का लक्ष्य बस्तर को संघर्ष की पहचान से आगे ले जाकर शिक्षा, पर्यटन, आजीविका और उद्योग के नए केंद्र के रूप में विकसित करना है।

उद्योगों के लिए आसान हुई प्रक्रियाएं

निवेश आकर्षित करने और उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए भी कई नीतिगत बदलाव किए गए हैं। छत्तीसगढ़ में 450 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार लागू किए गए हैं।

राज्य ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 लाने वाला देश का पहला राज्य बना है। जन विश्वास सुधारों के तहत 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है।

वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन प्रक्रिया और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसे सुधारों से उद्योग और कारोबार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया गया है।

नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावों से 1.72 लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर निर्मित होने की उम्मीद है।

नीतिगत बदलावों से व्यापक विकास की राह

छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों के दौरान सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों को भी प्राथमिकता दी है। किसान, महिला, गरीब और युवा केंद्रित योजनाओं के साथ उद्योग, बस्तर, डिजिटल गवर्नेंस और बुनियादी ढांचे पर लिए गए फैसले राज्य के विकास मॉडल को व्यापक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

सरकार की कोशिश है कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसका प्रत्यक्ष असर आम नागरिक के जीवन में दिखाई दे। यही नीतिगत बदलाव छत्तीसगढ़ को विकास, निवेश, रोजगार और सुशासन की नई दिशा देने की आधारभूमि तैयार कर रहे हैं।

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