रायपुर, 2 सितंबर 2026। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में बुधवार को 689 विद्यार्थियों को डिग्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इनमें 376 छात्राएं और 313 छात्र शामिल हैं। समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्र प्रदान किए।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी का भी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आज डिग्री मिल रही है, लेकिन आने वाले समय में उन्हें भारत की जनता के स्वास्थ्य, विश्वास और जीवन की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और विकास से खत्म हुआ नक्सलवाद: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में दशकों से चली आ रही इस समस्या को मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन के जरिए समाप्त किया गया है।
उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, खराब आवागमन और वामपंथी उग्रवाद के कारण छत्तीसगढ़ के कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में विकास प्रभावित हुआ। हिंसा और भय के कारण सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी बाधित रहा।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि, विकास और प्रगति के नए युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को दिया।
एम्स रायपुर बना स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव का प्रतीक
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापना के बाद एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्थान छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के लिए भी प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है।
उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। संस्थान का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे व्यापक बदलाव को दर्शाता है।
किडनी और कॉर्नियल ट्रांसप्लांट जैसी उपलब्धियों की सराहना
उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर में उन्नत चिकित्सा सेवाओं और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में हुए पहले किडनी ट्रांसप्लांट, किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर, कॉर्नियल ट्रांसप्लांट और कान प्रत्यारोपण जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम को मिली मंजूरी भी संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ये उपलब्धियां बताती हैं कि छत्तीसगढ़ में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं तेजी से सुलभ हो रही हैं।
उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए संतुलित विकास को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना तभी साकार होगी, जब प्रत्येक राज्य, जिला और गांव विकास की प्रक्रिया में आगे बढ़े।
उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 1.57 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गया। यह 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है।
युवाओं से नशे को ‘ना’ कहने का आह्वान
स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने युवाओं से नशीली दवाओं को दृढ़ता से ‘ना’ कहने और स्वस्थ एवं विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि युवाओं का ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे, उनका शोध नवाचार लाए और उनकी सेवा दूसरों के लिए प्रेरणा बने। उन्होंने एम्स रायपुर को नैदानिक उत्कृष्टता, वैज्ञानिक नवाचार, जन स्वास्थ्य और करुणापूर्ण सेवा के क्षेत्र में निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं।
राज्यपाल ने कहा- चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल तक सीमित नहीं है। एक अच्छे चिकित्सक के लिए धैर्य, करुणा और गहरी जिम्मेदारी की भावना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा है। चिकित्सक की श्रेष्ठता केवल उसकी पेशेवर दक्षता से नहीं, बल्कि मरीजों के साथ उसके व्यवहार, विश्वास और सम्मान से भी निर्धारित होती है।
राज्यपाल ने नव-स्नातक चिकित्सकों से स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, नवाचार और चिकित्सा अनुसंधान में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जिज्ञासा और अनुसंधान आधारित सोच अपनाने तथा समाज की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप नए समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
एम्स रायपुर की बढ़ती प्रतिष्ठा छत्तीसगढ़ के लिए गौरव
राज्यपाल ने कहा कि एम्स रायपुर अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों, विशिष्ट चिकित्सकीय सेवाओं और अनुसंधान पहलों के जरिए क्षेत्र के स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत कर रहा है। संस्थान की बढ़ती प्रतिष्ठा छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह इसके प्राध्यापकों, चिकित्सा विशेषज्ञों और पूरी टीम की उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने आयुष्मान भारत, PM-JAY, ABHA और e-Sanjeevani जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख करते हुए युवा डॉक्टरों से चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ करुणा, नैतिकता, निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और समाज सेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
16 मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार
दीक्षांत समारोह में विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को कुल 689 डिग्री प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले 16 विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने संस्थान की प्रगति और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में उच्च मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और पेशेवर कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र की सेवा में करने का आह्वान किया।
समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा सहित अन्य अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर विद्यार्थियों को ‘नशे को ना कहें’ की शपथ भी दिलाई गई।

