–जयश्री के.
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 10वीं परिणाम 2026 में इस बार भी संस्थागत और क्षेत्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है।
स्कूल कैटेगरी में केंद्रीय विद्यालय संगठन (KV) ने 99.57% पास प्रतिशत के साथ लगातार अपना दबदबा कायम रखते हुए पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद जवाहर नवोदय विद्यालय 99.42% और सेंट्रल तिब्बतन स्कूल प्रशासन 97.42% के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाले संस्थानों में शामिल रहे।
वहीं, निजी स्कूलों का पास प्रतिशत 93.77% रहा, जबकि सरकारी स्कूल 91.43% और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल 91.01% के साथ थोड़ा पीछे रहे।
स्कूल कैटेगरी वाइज प्रदर्शन
| क्रम | स्कूल कैटेगरी | पास प्रतिशत |
|---|---|---|
| 1 | केंद्रीय विद्यालय (KV) | 99.57% |
| 2 | जवाहर नवोदय विद्यालय | 99.42% |
| 3 | सेंट्रल तिब्बतन स्कूल | 97.42% |
| 4 | निजी स्कूल | 93.77% |
| 5 | सरकारी स्कूल | 91.43% |
| 6 | सरकारी सहायता प्राप्त | 91.01% |
रीजन स्तर पर इस बार दक्षिण भारत का दबदबा स्पष्ट रूप से नजर आया।
- त्रिवेंद्रम और विजयवाड़ा ने 99.79% पास प्रतिशत के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया
- चेन्नई 99.58% के साथ तीसरे स्थान पर रहा
- बेंगलुरु (98.91%) और दिल्ली वेस्ट (97.45%) ने भी टॉप 5 में जगह बनाई
| रैंक | रीजन | पास प्रतिशत |
|---|---|---|
| 1 | त्रिवेंद्रम | 99.79% |
| 2 | विजयवाड़ा | 99.79% |
| 3 | चेन्नई | 99.58% |
| 4 | बेंगलुरु | 98.91% |
| 5 | दिल्ली वेस्ट | 97.45% |
इस वर्ष भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बढ़त बनाई:
- लड़कियों का पास प्रतिशत: 94.99%
- कुल पास प्रतिशत: 93.70%
यह ट्रेंड लगातार दर्शाता है कि छात्राएं बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
KV और नवोदय की सफलता का कारण
केंद्रीय विद्यालय संगठन और जवाहर नवोदय विद्यालय का शानदार प्रदर्शन उनके
- मजबूत शैक्षणिक ढांचे
- प्रशिक्षित शिक्षकों
- समान पाठ्यक्रम और अनुशासन
की वजह से संभव हुआ है।
दक्षिण भारत का दबदबा क्यों?
त्रिवेंद्रम, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे क्षेत्रों का लगातार बेहतर प्रदर्शन दर्शाता है:
- शिक्षा पर अधिक फोकस
- बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर
- डिजिटल लर्निंग का ज्यादा उपयोग
सरकारी vs निजी स्कूल गैप
- निजी स्कूल: 93.77%
- सरकारी स्कूल: 91.43%
अंतर कम जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है।
Overall Trend
- पास प्रतिशत में हल्की बढ़ोतरी
- हाई स्कोरर्स की संख्या बढ़ी
- क्षेत्रीय असमानता बरकरार

