रायपुर। छत्तीसगढ़ में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने और नकली व अमानक उर्वरकों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने रिकॉर्ड स्तर पर कार्रवाई की है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत खरीफ 2026 सीजन में प्रवर्तन कार्रवाई में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
कृषि विभाग के अनुसार, उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत वर्ष 2025 की तुलना में कार्रवाई में 10.25 गुना वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 44 मामलों के मुकाबले इस बार 451 मामलों में कार्रवाई की गई, जो उर्वरकों की गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में राज्य की सख्त निगरानी को दर्शाती है।
विभाग ने बताया कि राज्यभर में उर्वरकों के भंडारण, विक्रय, वितरण और गुणवत्ता की नियमित जांच की जा रही है। अभियान के दौरान न्यायालय में प्रस्तुत प्रकरणों की संख्या 4 से बढ़कर 56, जब्ती की कार्रवाई 2 से बढ़कर 98, लाइसेंस निलंबन 3 से बढ़कर 97, लाइसेंस निरस्तीकरण 2 से बढ़कर 10 और विक्रय प्रतिबंध 33 से बढ़कर 183 मामलों तक पहुंच गया। इसके अलावा पहली बार 7 एफआईआर भी दर्ज कराई गई हैं।
कृषि विभाग का कहना है कि इन सख्त कार्रवाइयों से किसानों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में अमानक उर्वरकों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगा है। विभाग नियमित निरीक्षण, नमूना परीक्षण, शिकायतों के त्वरित निराकरण और दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई के जरिए पारदर्शी आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित कर रहा है।
सरकार का लक्ष्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि किसानों को प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि करना भी है। विभाग का मानना है कि सतत निगरानी और सख्त प्रवर्तन से प्रदेश में सुरक्षित एवं विश्वसनीय कृषि व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

