क्रिटिकल मिनरल्स की नीलामी में छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक शामिल, निवेशकों से सक्रिय भागीदारी की अपील
रायपुर, 31 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की पहचान अब केवल खनिज उत्पादन करने वाले राज्य के रूप में नहीं रहेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य अन्वेषण, उत्खनन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन को प्रदेश में विकसित करना है। इससे निवेश और उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सोमवार को नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने ई-रेत संगवारी और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। साथ ही छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) और इंडियन ओवरसीज बैंक तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच महत्वपूर्ण एमओयू भी हुए।
क्रिटिकल मिनरल्स होंगे आर्थिक और सामरिक शक्ति का आधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में भारत की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के प्रमुख आधार होंगे। रक्षा उद्योग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए इनकी विश्वसनीय आपूर्ति बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में दुनिया के प्रमुख देश अपने रणनीतिक संसाधनों और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में भारत का आत्मनिर्भर होना आर्थिक जरूरत के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
छत्तीसगढ़ के 5 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक नीलामी में
मुख्यमंत्री ने बताया कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक शामिल हैं, जिनमें 5 ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हैं।
उन्होंने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं, बल्कि अन्वेषण, प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, नवाचार और नए उद्योगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ और देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का अवसर है।
लिथियम से लेकर निकेल-क्रोमियम तक व्यापक संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में शामिल है और अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट की संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
खनिज बाहर भेजने के बजाय प्रदेश में होगा वैल्यू एडिशन
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच सिर्फ खनिज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। प्रयास है कि खनिजों के उत्खनन के बाद उनका प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और उनसे जुड़े एडवांस मैन्युफैक्चरिंग उद्योग भी छत्तीसगढ़ में स्थापित हों।
उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता इन उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान कर सकती है।
निवेशकों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार निवेश अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। नई औद्योगिक नीति में उभरते और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के लिए कई प्रोत्साहन दिए गए हैं।
वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0, पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क एवं विद्युत शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन जैसी सुविधाओं के माध्यम से निवेशकों को सहयोग दिया जा रहा है।
खनिज राजस्व बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व करीब 400 करोड़ रुपये था। लगभग ढाई वर्ष पहले यह करीब 12 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि खनिज राजस्व का उपयोग प्रदेश के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। डीएमएफ के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ स्थानीय लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए काम किए जा रहे हैं।
अब तक 56 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सतत और जिम्मेदार खनन को बढ़ावा दे रही है, जिसमें पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने बताया कि केंद्र सरकार ने अब तक 88 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की है, जिनमें 56 ब्लॉक्स की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत का पहला लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से संबंधित है।
वैज्ञानिक अन्वेषण और पारदर्शी व्यवस्था पर राज्य का विशेष जोर रू खनिज सचिव श्री पी. दयानंद

खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के सतत उपयोग, वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी नीलामी और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण सहित विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से वैज्ञानिक सर्वेक्षण, भू-आंकड़ों के संकलन और मैपिंग को मजबूत कर रही है। ऑनलाइन एवं पारदर्शी व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि संभावित खनिज क्षेत्रों को तेजी से उत्पादनशील खदानों में परिवर्तित किया जा सके। सरकार का लक्ष्य खनिज उत्खनन के साथ खनिज आधारित उद्योग, स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और मूल्य संवर्धन को भी गति देना है।
ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट, 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे

खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में सतत खनन पद्धतियों के साथ खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को लगभग 16 हजार 700 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है। खनिज राजस्व में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है। प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की गई है, जिनसे लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, गोल्ड, टंगस्टन, निकेल, क्रोमियम, कॉपर, लेड-जिंक और डायमंड सहित विभिन्न महत्वपूर्ण खनिजों की व्यापक संभावनाएं हैं। कटघोरा में लिथियम, बलरामपुर में ग्रेफाइट-वैनेडियम-गैलियम तथा बस्तर के टिन बेल्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में अन्वेषण एवं नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
ई-रेत संगवारी से पीएम आवास हितग्राहियों को सुविधा
मुख्यमंत्री ने ई-रेत संगवारी पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा।
वहीं, टिन पोर्टल के माध्यम से दंतेवाड़ा क्षेत्र के टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
सीएमडीसी के दो महत्वपूर्ण एमओयू
कार्यक्रम में सीएमडीसी और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू हुआ। इससे खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा सीएमडीसी और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग प्रशिक्षण के लिए एमओयू किया गया। इससे कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और रोजगार के अवसरों को गति मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।

