नक्सलवाद के घावों पर मरहम लगाएगी सरकार, 200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’: अमित शाह

दंतेवाड़ा में 768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण, CM विष्णु देव साय बोले—नक्सलमुक्त बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय क्षेत्र बनाएंगे

रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। नक्सलवाद ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी है। अब नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से हंसता-खेलता, खुशहाल और समृद्ध बनाना है। केंद्र सरकार इस कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में आयोजित निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर के दूसरे चरण का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारंभ किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वर्चुअली शामिल हुए।

15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस शिविर में दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान किए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लाभार्थी शामिल हैं। इससे पहले 5 से 7 अक्टूबर तक जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे।

200 से अधिक सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा और विकास के केंद्र

अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान के दौरान स्थापित 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों से अब सुरक्षा के साथ जनसेवा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर कभी सुरक्षा बल लोगों की रक्षा के लिए तैनात रहते थे, अब वहीं से केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी विकसित बस्तर की नींव मजबूत करेंगे। यह पहल दूरस्थ क्षेत्रों में विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर जोर

केंद्रीय गृह मंत्री ने बताया कि नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास के तहत लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1,620 को इनामी राशि और 7,882 को प्रोत्साहन राशि दी गई। वहीं, 455 लोगों को नौकरी और 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अतिरिक्त 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए और 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई है। क्षेत्र में संपर्क सुविधाओं के विस्तार के लिए 372 नई सड़क परियोजनाएं शुरू की गई हैं तथा 670 पुलियों का निर्माण किया जा रहा है।

शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम, नियद नेल्लानार और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा जैसी पहलों से क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। अब बस्तर की पहचान हिंसा नहीं, बल्कि खेल, संस्कृति, विकास और समृद्धि से होगी।

नक्सलमुक्त बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय क्षेत्र बनाएंगे: CM साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सलवाद की चुनौती से मुक्ति मिली है। यह उपलब्धि वीर सुरक्षा बलों के साहस, पराक्रम और बलिदान तथा बस्तर की जनता के सहयोग से संभव हुई है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में बलिदान देने वाले जवानों और हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अब बस्तर को विकास की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारा संकल्प बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना है।

साय ने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले जिन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, वहां अब विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं।

सेवा डेरों से रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा शुरू किया गया है। यहां स्थानीय लोगों को सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि बस्तर में पशुपालन और डेयरी विकास को प्रोत्साहित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं से करीब 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों और कौशल के आधार पर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना तथा युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।

768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग, लौटेगा आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सली हिंसा और आईईडी विस्फोटों के कारण अनेक निर्दोष ग्रामीणों ने अपने अंग गंवाए हैं। ऐसे लोगों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण उपलब्ध कराना केवल सहायता नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने का अवसर देना है।

भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं की मदद से आयोजित शिविर में लाभार्थियों को कृत्रिम पैर, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र और अन्य उपकरण दिए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद अब वे दोबारा चलने लगे हैं। वहीं, बीजापुर के चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में आईईडी विस्फोट में अपना दायां पैर गंवाने के बाद कृत्रिम पैर मिलने से उन्हें फिर से चलने का अवसर मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नक्सल हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के पुनर्वास और बेहतर भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है। नक्सलमुक्त बस्तर में अब शांति, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास के नए अध्याय लिखे जाएंगे।

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