प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को किया संबोधित, गंगा-महाकम विज़न से द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा

PM at the Parliament of Indonesia in Jakarta, Indonesia on July 07, 2026.

जकार्ता. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊर्जा देने का आह्वान किया। वह इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और संसद की अध्यक्ष पुआन महारानी का आभार व्यक्त करते हुए की तथा भारत के 1.4 अरब नागरिकों की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, जिसे लोकतंत्र की जननी माना जाता है, इंडोनेशिया के साथ लोकतांत्रिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोनों देशों के बीच दो हजार वर्षों से अधिक पुराने सभ्यतागत और समुद्री संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंद महासागर ने व्यापार, संस्कृति, विचारों और आस्था के आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों को लगातार जोड़े रखा है। उन्होंने भारत के “वसुधैव कुटुम्बकम्” और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय आदर्श “भिन्नेका तुंग्गल इका” (विविधता में एकता) को साझा मूल्यों का प्रतीक बताया।

मोदी ने विकसित भारत 2047 और गोल्डन इंडोनेशिया 2045 के लक्ष्यों के बीच समानताओं पर प्रकाश डालते हुए व्यापार, निवेश, संपर्क, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूत करने और स्वतंत्र, मुक्त, समावेशी एवं नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए दोनों देशों के साझा प्रयासों की आवश्यकता पर भी बल दिया।

प्रधानमंत्री ने भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई दिशा देने के लिए “गंगा-महाकम विज़न” का प्रस्ताव रखा। इस विज़न के तहत सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने, विकास के अनुभव साझा करने, सुरक्षा एवं रणनीतिक सहयोग बढ़ाने, समुद्री समृद्धि को प्रोत्साहित करने तथा वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि साझा इतिहास, समान लोकतांत्रिक मूल्य और भविष्य की साझा आकांक्षाएं भारत और इंडोनेशिया को स्वाभाविक एवं विश्वसनीय साझेदार बनाती हैं। यह संबोधन दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *