भारत-इंडोनेशिया ने रक्षा, व्यापार और डिजिटल सहयोग को दी नई गति, संयुक्त वक्तव्य में कई अहम घोषणाएं

PM at the Parliament of Indonesia in Jakarta, Indonesia on July 07, 2026.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6 से 8 जुलाई 2026 तक इंडोनेशिया की आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने के लिए संयुक्त वक्तव्य जारी किया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर हुई इस यात्रा में दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, अंतरिक्ष, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग सहित अनेक क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई।

जकार्ता स्थित इस्ताना मर्देका में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो के बीच द्विपक्षीय एवं प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने नियमित शिखर बैठकों, मंत्रिस्तरीय संवाद और संसदीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को भी संबोधित किया तथा दोनों नेताओं ने योग्याकार्ता स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन मंदिर परिसर में संरक्षण परियोजना का उद्घाटन किया।

संयुक्त वक्तव्य में रक्षा सहयोग को नई दिशा देते हुए ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, रक्षा प्रौद्योगिकी, संयुक्त उत्पादन, सैन्य प्रशिक्षण, नौसैनिक अभ्यास और समुद्री सुरक्षा सहयोग को विस्तार देने पर सहमति बनी। आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों ने शून्य-सहिष्णुता की नीति दोहराई और आतंकवादी वित्तपोषण, साइबर सुरक्षा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।

आर्थिक क्षेत्र में दोनों देशों ने व्यापार एवं निवेश बढ़ाने, स्थानीय मुद्रा में लेनदेन, सीमा-पार क्यूआर भुगतान प्रणाली, महत्वपूर्ण खनिज, इस्पात, ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था में साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया। सबांग बंदरगाह के विकास, अंडमान-आचे संपर्क, दूरसंचार, स्वास्थ्य, कृषि और खाद्य सुरक्षा में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

दोनों देशों ने अंतरिक्ष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति देने का फैसला किया। साथ ही 2026-27 को “टैगोर-देवंतरा वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की गई।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत और इंडोनेशिया ने स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूत करने और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त वक्तव्य को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।

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