मुंबई, 6 अगस्त: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने छात्र आंदोलनों, Gen Z, शिक्षा व्यवस्था, सोशल मीडिया, एलजीबीटी समुदाय और महिलाओं की भूमिका सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। एक छात्र संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि Gen Z विरोध-प्रदर्शन कर रही है तो उन्हें “देशविरोधी” कहना उचित नहीं है, क्योंकि उनकी शिकायतें वास्तविक हैं और उन्हें संवाद के माध्यम से समझने की जरूरत है।
Gen Z को देशविरोधी कहना गलत: मोहन भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि Gen Z और Gen Alpha देश की नई पीढ़ी हैं और उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी सवाल पूछती है, तार्किक जवाब चाहती है और ईमानदारी के साथ देशभक्ति एवं सेवा की अपील को समझती है।
उन्होंने कहा, “अगर Gen Z प्रदर्शन कर रही है तो इसका मतलब यह नहीं कि वे एंटी-नेशनल हैं। वे हमारे अपने लोग हैं और उनकी चिंताओं का समाधान संवाद से होना चाहिए।”
लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का भी है स्थान
भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन सहमति बनाने का एक वैध माध्यम है। विभिन्न विचारों के बीच संवाद और शास्त्रार्थ से बेहतर समाधान निकलते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य समाज में विभाजन नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों से यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा व्यवस्था में कई कमियां हैं। उन्होंने कहा कि:
- शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए।
- शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
- शिक्षा को कमाई का माध्यम नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार माना जाना चाहिए।
- देश में शिक्षकों के लगभग 10 लाख रिक्त पद जल्द भरे जाने चाहिए।
- शिक्षा पर GDP का 6 प्रतिशत खर्च करने की लंबे समय से चली आ रही मांग उचित है।
पैलेट गन फायरिंग पर क्या बोले?
छात्रों पर कथित पैलेट गन फायरिंग के सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि उनके पास इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए बिना तथ्य जाने टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि किसी पर भरोसा करने की बात होगी तो वह नई पीढ़ी पर भरोसा करेंगे।
सोशल मीडिया पर जताई चिंता
सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो और गलत सूचनाओं को लेकर भागवत ने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों में सही दृष्टिकोण विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने विश्वसनीय और प्रमाणिक सूचना स्रोतों की आवश्यकता पर जोर दिया।
पाकिस्तान और चीन के साथ संवाद पर राय
पाकिस्तान और चीन के साथ नागरिक समाज के संपर्क को लेकर उन्होंने कहा कि युद्ध या आतंकवाद जैसी परिस्थितियों में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश के साथ संवाद हमेशा के लिए बंद नहीं किया जा सकता।
LGBTQ समुदाय और समलैंगिक विवाह पर टिप्पणी
एलजीबीटी समुदाय को समाज का हिस्सा बताते हुए भागवत ने कहा कि सभी को सम्मान मिलना चाहिए। हालांकि समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि विवाह संस्था में किसी भी बड़े बदलाव से पहले उसके सामाजिक प्रभावों पर गंभीर विचार होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसा समाधान विकसित किया जाए जिससे दो लोग सम्मानपूर्वक साथ रह सकें।
महिलाओं की भूमिका पर क्या कहा?
महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम हैं और उन्हें समान अवसर तथा प्रशिक्षण मिलना चाहिए। आरएसएस में महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि संगठन की स्थापना के समय परिस्थितियां अलग थीं, लेकिन आज समय बदल चुका है और ऐसे सवाल स्वाभाविक हैं।
FAQ
1. मोहन भागवत ने Gen Z के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि Gen Z को विरोध-प्रदर्शन करने के कारण देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उनकी शिकायतें वास्तविक हैं और संवाद से समाधान निकाला जाना चाहिए।
2. छात्र आंदोलनों पर RSS प्रमुख की क्या राय है?
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन वैध है, लेकिन उसका उद्देश्य समाज में विभाजन नहीं बल्कि सुधार होना चाहिए।
3. शिक्षा व्यवस्था पर मोहन भागवत ने क्या सुझाव दिए?
उन्होंने शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने, शिक्षकों के रिक्त पद भरने और शिक्षा पर GDP का 6 प्रतिशत खर्च करने की मांग का समर्थन किया।
4. LGBTQ समुदाय पर उनका क्या बयान था?
उन्होंने कहा कि LGBTQ समुदाय समाज का हिस्सा है और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। हालांकि समलैंगिक विवाह पर उन्होंने व्यापक सामाजिक विमर्श की आवश्यकता बताई।

