भारत की प्रगति के लिए रिसर्च और इनोवेशन जरूरी, युवाओं को AI-रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए तैयार होना चाहिए: उपराष्ट्रपति

इरोड में कार्यक्रम को संबोधित करते उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

इरोड, तमिलनाडु: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा है कि भारत की निरंतर प्रगति के लिए अनुसंधान, नवाचार और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से बुनियादी शिक्षा तक सीमित न रहते हुए उन्हें ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्रों के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति शनिवार को तमिलनाडु के इरोड जिले के पेरुंदुरई में कोंगू वेल्लालर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KVIT) ट्रस्ट के संस्थापक दिवस समारोह और ‘अरिवुकुडम’ के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

युवाओं को रिसर्च ओरिएंटेड एजुकेशन की ओर बढ़ने की सलाह

सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं से लगातार अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को बुनियादी शिक्षा से आगे बढ़कर अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा की ओर बढ़ना चाहिए।

उन्होंने युवाओं को रिसर्च, इनोवेशन और पेटेंट के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम करने की सलाह दी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए खुद को तैयार करना होगा।

‘परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर चीज’

उपराष्ट्रपति ने युवाओं को सफलता के लिए अपनी क्षमताओं को पहचानने, स्पष्ट लक्ष्य तय करने और निरंतर प्रयास करते रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी खूबियों और लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने मानसिक शांति और एकाग्रता के लिए योग और ध्यान के महत्व पर भी जोर दिया। इस दौरान उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचार का उल्लेख करते हुए कहा, “आप जैसा सोचते हैं, वैसे ही बन जाते हैं।”

‘अरिवुकुडम’ बनेगा रिसर्च और इनोवेशन का केंद्र

सीपी राधाकृष्णन ने विश्वास जताया कि ‘अरिवुकुडम’ अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान सृजन का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान वैश्विक ज्ञान केंद्रों के रूप में शिक्षा और अनुसंधान को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय विकास में भी योगदान दे सकते हैं।

उपराष्ट्रपति ने 41 संस्थापकों की दूरदृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि KVIT से जुड़े संस्थानों के माध्यम से लगभग एक लाख लोगों ने शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने कोंगू क्षेत्र में शिक्षा के विकास में संस्थान के योगदान की प्रशंसा की। साथ ही जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस और जापान समेत विभिन्न देशों के साथ संस्थानों के वैश्विक संबंधों का भी उल्लेख किया।

उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सहयोग पर जोर

भारत की प्रगति के लिए उद्योग और शिक्षा जगत के बीच मजबूत साझेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कोंगू इंजीनियरिंग कॉलेज के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का दौरा किया। प्रदर्शनी में विभिन्न नवोन्मेषी परियोजनाओं और तकनीकी समाधानों को प्रदर्शित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान एंकर इंडस्ट्रीज और अरिवुकुडम रिसर्च पार्क के बीच समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी हुआ। इस पहल का उद्देश्य उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना और अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना है।

कई नई परियोजनाओं की आधारशिला

उपराष्ट्रपति ने कॉलेज और ट्रस्ट से जुड़े विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया। उन्होंने अरिवुकुडम रिसर्च पार्क, फार्मेसी कॉलेज, कोंगू नेचुरोपैथी एंड योग मेडिकल कॉलेज और KVITT के क्लाउड किचन समेत विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला से संबंधित पट्टिकाओं का अनावरण किया।

कार्यक्रम में तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश, KVIT ट्रस्ट के अध्यक्ष देवराजन सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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