शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं तथा सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज के निर्माण में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

समारोह में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित किया। वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा भी की।

शिक्षक राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता: मुख्यमंत्री साय

समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सम्मानित शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है।

मुख्यमंत्री ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। भारतीय परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है।

शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने सरकार के कई प्रयास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

स्थानीय बोली में प्रारंभिक शिक्षा पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय जरूरतों को भी महत्व दिया जा रहा है।

बस्तर अंचल में बच्चों को स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।

उन्होंने शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देने की बात कही। इसके माध्यम से अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।

341 स्कूलों का पीएम श्री योजना के लिए चयन

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

बस्तर में एजुकेशन सिटी से दूरस्थ बच्चों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं।

इन प्रयासों से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षकों की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षा विभाग और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

उन्होंने कहा कि आज शिक्षक जिन बच्चों को ज्ञान, संस्कार और कौशल दे रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ और देश के विकास का नेतृत्व करेंगे। इसलिए शिक्षक का योगदान केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और पूरे समाज पर पड़ता है।

AI आधारित स्मार्ट स्कूलों से शिक्षा में नवाचार

समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मंत्री यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा भी की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार

राज्य स्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों को विशिष्ट राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए।

  • खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के राजेश कुमार प्रजापति को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार।
  • कोरबा जिले के कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार।
  • दुर्ग जिले की प्रज्ञा सिंह को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार।
  • सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की प्रियंका गोस्वामी को श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार।

इसके अलावा प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक और सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के कुल 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सम्मानित शिक्षकों के योगदान और नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए अतिथियों ने उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।

समारोह में ये अधिकारी और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद

समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी ने आभार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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