पेरिस। फ्रांस की राजधानी पेरिस में छात्रों और कर्मचारियों के नए विरोध मार्च को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्कूलों के लिए अधिक बजट, बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और बढ़ती महंगाई से राहत की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर रहे हैं। पिछले सप्ताह विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा, दुकानों में लूटपाट और वाहनों में आगजनी की घटनाओं के बाद प्रशासन ने इस बार एहतियाती कदम उठाए हैं।
प्रदर्शन को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस ने मार्च के निर्धारित मार्ग में बदलाव किया है। इसके साथ ही फ्रांस के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती की योजना बनाई गई है। प्रशासन को आशंका है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने से एक बार फिर हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की स्थिति बन सकती है।
पेरिस में बदला गया विरोध मार्च का रास्ता
पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों के दौरान पेरिस समेत कई शहरों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। नकाब पहने कुछ समूहों ने दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। कई स्थानों पर लूटपाट, वाहनों में आगजनी और सार्वजनिक इमारतों पर हमले भी हुए थे।
इन घटनाओं के मद्देनजर पुलिस ने शनिवार के मार्च के लिए नया मार्ग निर्धारित किया है। पहले प्रदर्शन को बास्ती क्षेत्र के आसपास आयोजित करने की योजना थी, लेकिन अब इसे पोर्त द इटली से पोर्त द विन्सेन तक सीमित किया गया है।
नए मार्ग के कारण प्रदर्शन पेरिस के केंद्रीय हिस्से से दूर रहेगा। अधिकारियों का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पिछले सप्ताह जैसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकना है।
स्कूलों की बदहाली से शुरू हुआ आंदोलन, अब महंगाई भी बड़ा मुद्दा
फ्रांस में यह आंदोलन पिछले महीने एक हाई स्कूल में कर्मचारियों की कमी को लेकर शुरू हुआ था। शुरुआत में प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें अन्य मांगें भी शामिल हो गईं।
छात्रों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं:
- स्कूलों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए।
- शैक्षणिक संस्थानों की इमारतों और बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए।
- विश्वविद्यालयों में अधिक सीटें उपलब्ध कराई जाएं।
- शिक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त सरकारी बजट सुनिश्चित किया जाए।
वहीं, मजदूर संगठनों ने बढ़ती महंगाई के बीच वेतन और पेंशन में वृद्धि की मांग उठाई है। उनका कहना है कि महंगाई के कारण आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है और राहत के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
इस तरह शिक्षा से जुड़ी शिकायतों से शुरू हुआ आंदोलन अब रोजगार, आय और जीवन-यापन की बढ़ती लागत जैसे व्यापक सामाजिक-आर्थिक मुद्दों से जुड़ गया है।
गृह मंत्री ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या कहा?
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, देशभर में 70 हजार तक पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षा अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था में हेलीकॉप्टर, बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाले वाहन भी शामिल होंगे।
पेरिस में आर्क द त्रिओंफ और उसके आसपास की सड़कों पर भी पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रमुख सार्वजनिक स्थलों और संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
पिछले सप्ताह पांच लाख से अधिक लोगों के सड़कों पर उतरने की जानकारी के बाद इस बार भी बड़े पैमाने पर भागीदारी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की वास्तविक संख्या मार्च के दौरान ही स्पष्ट होगी।
हिंसा की आशंका से संग्रहालय और कला कार्यक्रम प्रभावित
प्रदर्शन के दौरान संभावित हिंसा और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का असर पेरिस के सांस्कृतिक स्थलों पर भी दिखाई दे रहा है। शनिवार को लूव्र, ओरसे संग्रहालय, पिकासो संग्रहालय और ग्रां पालै सहित कई प्रमुख संग्रहालय बंद रखे गए हैं।
ग्रां पालै में प्रसिद्ध चित्रकार पॉल सेजां की प्रमुख प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण यहां आने वाले दर्शकों और कला प्रेमियों की गतिविधियों पर भी असर पड़ा है।
इसके अलावा, आर्ट बेसल से जुड़े सप्ताहांत के कार्यक्रम भी रद्द कर दिए गए हैं। यह कला जगत के प्रमुख समकालीन कला आयोजनों में गिना जाता है। आयोजकों ने संभावित हिंसा को देखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।
फ्रांस सरकार के सामने कानून-व्यवस्था और जन असंतोष की चुनौती
फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शन सरकार के सामने दोहरी चुनौती पेश कर रहे हैं। एक तरफ छात्रों और कर्मचारियों की शिक्षा, वेतन, पेंशन और महंगाई से जुड़ी मांगें हैं, तो दूसरी तरफ सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
प्रशासन ने मार्च का मार्ग बदलने और बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे कदम उठाए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होते हैं या पिछले सप्ताह की तरह हिंसा की घटनाएं फिर सामने आती हैं।

