मन की बात के 12 साल पूरे, पीएम मोदी बोले- यह सफर किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं

PM’s Remarks and Statement at BRICS Summit Session, in Bharat Mandapam, New Delhi on September 12, 2026.

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 12 वर्ष पूरे होने पर इस यात्रा को किसी तीर्थयात्रा जैसा बताया। आकाशवाणी से प्रसारित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि विजयादशमी के पावन अवसर पर शुरू हुआ यह सफर निरंतर जारी है। इस दौरान श्रोता उनके सहयात्री और मार्गदर्शक दोनों बने हैं। ‘मन की बात’ देश के सामान्य नागरिकों के परिश्रम, पराक्रम, प्रतिबद्धता, समर्पण और सेवाभाव को नमन करने का माध्यम रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए उन्हें देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर मिला है। समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित लोग स्वयं किसी तीर्थ के समान हैं। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से वह देश की लोकशक्ति की आराधना कर रहे हैं। श्रोताओं का स्नेह और आत्मीयता उनकी अमूल्य पूंजी है।

पंजाब में पारंपरिक बुनकरी को मिल रहा बढ़ावा

पीएम मोदी ने पंजाब में ‘खेती विरासत मिशन’ की पहल का उल्लेख किया, जिसके तहत जैविक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ‘नव त्रिंजन’ पहल के माध्यम से रसायनों के इस्तेमाल के बिना जैविक कपास उगाई जा रही है। इससे तैयार धागे और कपड़ों को रंगने के लिए भी रसायनों की आवश्यकता नहीं पड़ती। बुनकरी के पारंपरिक हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए बुनाई स्कूल भी शुरू किया गया है।

प्रधानमंत्री ने रमनदीप कौर, सुनेहा देवी और रजनी कौर जैसी महिलाओं का उल्लेख किया, जिन्होंने अपने हुनर से बुनकर के रूप में नई पहचान बनाई है। उन्होंने रेखा रानी की बुनी शॉल का भी जिक्र किया, जिसे राष्ट्रपति को भेंट किया गया।

जनभागीदारी से हेवल नदी को मिला नया जीवन

प्रकृति संरक्षण पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी के पुनर्जीवन की सराहना की। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर वर्षा जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और पौधरोपण के प्रयास किए। इन पहलों से नदी को नया जीवन मिला और कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली।

त्योहारों पर स्वच्छता और स्वदेशी उत्पादों पर जोर

प्रधानमंत्री ने दीपावली और छठ से पहले चलाए जा रहे स्वच्छता अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी आसपास के वातावरण में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपने घर और आसपास स्वच्छता बनाए रखने की अपील की।

उन्होंने त्योहारों के दौरान स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने की बढ़ती प्रवृत्ति पर प्रसन्नता व्यक्त की। पीएम मोदी ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा रही है। बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव तक पहुंच रही है। इससे भारतीय किसानों के लिए नए बाजार खुल रहे हैं।

आदिवासी उत्पादों की पैकेजिंग को मिला जापान का सम्मान

प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के जनजातीय समुदायों के उत्पादों की आकर्षक पैकेजिंग की भी सराहना की। ‘शबरी नैचुरल्स’ पहल के तहत शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को आदिवासी कला एवं संस्कृति को दर्शाने वाली पैकेजिंग के साथ बाजार में उतारा जा रहा है। इस पैकेजिंग को जापान के ‘गुड डिजाइन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी पैकेजिंग भी महत्वपूर्ण है। भारतीय पारंपरिक हुनर, स्थानीय उत्पादों और जनभागीदारी के ऐसे प्रयास आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती दे रहे हैं।

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