रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के विकास, निवेश, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कैबिनेट ने बिजली भुगतान की सुरक्षा के लिए ट्रिपार्टाइट एग्रीमेंट की जगह आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (DDM) लागू करने को मंजूरी दी। इससे एनटीपीसी सहित अन्य केंद्रीय उपक्रमों से बिजली आपूर्ति निर्बाध रहेगी और भुगतान प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।
बैठक में बस्तर फाइटर्स से जुड़े भर्ती एवं सेवा नियमों में संशोधन को स्वीकृति दी गई, वहीं निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 के जरिए उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
जीएसटी व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त करने और लंबित मामलों को राजस्व मंडल को स्थानांतरित करने का फैसला भी लिया गया। इसके साथ ही जीएसटी संशोधन विधेयक के माध्यम से कर प्रक्रियाओं को सरल और रिफंड सिस्टम को तेज बनाने पर जोर दिया गया है।
औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन संशोधन विधेयक तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक को मंजूरी दी गई, जिसमें डीम्ड परमिशन, सेल्फ-सर्टिफिकेशन और जोखिम आधारित निरीक्षण जैसे प्रावधान शामिल हैं।
नवा रायपुर में OTS योजना-2026 के जरिए भूखंड आवंटियों को राहत देने, जल प्रदूषण कानून संशोधन लागू करने और किरायेदारी कानून में सुधार जैसे फैसले भी लिए गए।
इसके अलावा राजनांदगांव में 2000 सीटों वाले आधुनिक ऑडिटोरियम निर्माण हेतु भूमि आवंटन को भी स्वीकृति दी गई है। ये सभी निर्णय राज्य में विकास, निवेश और सुशासन को नई गति देने वाले माने जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: बिजली भुगतान से लेकर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस तक अहम निर्णय
