रायपुर। जीएसटी व्यवस्था को सरल बनाने और व्यापारियों पर अनुपालन का बोझ कम करने के उद्देश्य से 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की गई है। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इन प्रस्तावों को व्यापार सुगमता, पारदर्शिता और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में जीएसटी पंजीयन, रिफंड, ई-वे बिल जांच, इनपुट टैक्स क्रेडिट और दंडात्मक प्रावधानों में बदलाव पर चर्चा हुई।
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि जीएसटी 2.0 के माध्यम से कर दरों में किए गए बदलावों के बाद अब प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य ईमानदार करदाताओं को राहत देना और व्यापारिक गतिविधियों को अधिक सुगम बनाना है।
गिरफ्तारी और अभियोजन संबंधी प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव
वित्त मंत्री के अनुसार, जीएसटी परिषद ने गिरफ्तारी से संबंधित धारा 69 को हटाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही अभियोजन के लिए कर राशि की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने और सामान्य जुर्माने की अधिकतम राशि 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य छोटे मामलों और सामान्य प्रक्रियागत त्रुटियों में व्यापारियों को राहत देना है। जानबूझकर कर चोरी और धोखाधड़ी के मामलों में लागू कानून के अनुसार कार्रवाई का प्रावधान बना रहेगा।
ई-वे बिल जांच में जवाबदेही बढ़ाने की सिफारिश
प्रस्तावित बदलावों के अनुसार, मालवाहक वाहनों को जांच के लिए रोकने से पहले ठोस सूचना और संयुक्त आयुक्त या उससे उच्च स्तर के अधिकारी की अनुमति आवश्यक होगी। साथ ही ई-वे बिल जांच के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करने की सिफारिश की गई है। इससे परिवहन में अनावश्यक देरी कम करने और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रिफंड प्रक्रिया होगी तेज और पंजीयन में सरलीकरण
जीएसटी परिषद ने इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि के रिफंड को स्वचालित रूप से मंजूर करने का प्रस्ताव दिया है। निर्यात और उलटे शुल्क ढांचे से जुड़े पात्र मामलों में रिफंड दावे की 90 प्रतिशत राशि तत्काल जारी करने तथा आवेदन जांच की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की भी सिफारिश की गई है।
पंजीयन संबंधी जानकारियों में संशोधन और पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया को भी अधिक सरल एवं तकनीक आधारित बनाने का प्रस्ताव है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं को भी राहत देने की सिफारिश की गई है, जिससे उन्हें नए बाजारों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है।
इनपुट टैक्स क्रेडिट और छोटे व्यापारियों को राहत
परिषद की सिफारिशों में आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर और फैक्ट्री परिसर के बाहर स्थापित पाइपलाइन से संबंधित पात्र मामलों में इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है।
इसके अतिरिक्त, 10 हजार रुपये से कम कर राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं करने, गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में निर्धारित समय के भीतर कर और ब्याज जमा करने पर पांच प्रतिशत जुर्माने तथा पांच करोड़ रुपये तक वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को निर्धारित शर्तों के तहत विलंब शुल्क में राहत देने की सिफारिश की गई है।
1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि इन प्रक्रियागत सुधारों को आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से छत्तीसगढ़ के व्यापारियों, परिवहन व्यवसायियों, निर्यातकों, स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी व्यापार और उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। केंद्र के कर सुधारों और राज्य के निवेश संबंधी प्रयासों से औद्योगिक गतिविधियों तथा रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरल और पारदर्शी कर व्यवस्था देश की आर्थिक प्रगति तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इन सुधारों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया।

