नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (CBSE) की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया अब प्रशासनिक संकट में बदल गई है। छात्रों की शिकायतों और टेंडर विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बोर्ड के शीर्ष स्तर पर बड़ा बदलाव किया है।
OSM विवाद में उच्च स्तर की कार्रवाई
सरकार ने CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को हटाने का निर्णय लिया। यह कदम छात्रों की शिकायतों और पूरे मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा के बाद उठाया गया। बोर्ड ने इस प्रक्रिया के दौरान तकनीकी खामियों और साइबर सुरक्षा की चुनौतियों को गंभीरता से लिया।
री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक
CBSE ने बताया कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर बड़े पैमाने पर साइबर अटैक की कोशिश हुई। केवल कुछ मिनटों में लाखों एक्सेस अटेम्प्ट दर्ज हुए और सिस्टम फाइलों तक अनधिकृत पहुंच की कोशिश भी हुई। इसके बावजूद पोर्टल पूरी तरह बंद नहीं हुआ और हजारों छात्रों ने समय रहते आवेदन कर दिया। इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छात्रों की शिकायतें संसद तक पहुंची
OSM प्रक्रिया को लेकर छात्रों की शिकायतें संसद की स्थायी समिति तक पहुंची हैं। कई छात्रों ने प्रणाली में खामियों और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। शिक्षा मंत्रालय ने अब इस मामले की रिपोर्ट तलब की है और तकनीकी व प्रशासनिक पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।
टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल
मामला केवल मार्किंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि टेंडर आवंटन प्रक्रिया तक पहुंच गया। COEMPT नामक एजेंसी को दिए गए टेंडर की जांच के आदेश दिए गए हैं। कुछ राज्यों में पहले से इस कंपनी से जुड़े विवादों का उल्लेख भी सामने आया है, जिससे जांच और व्यापक हो गई है।

