एनआईटी रायपुर ने इसरो-एनआरएससी तकनीकी संवाद और स्पेसटेक आइडियाथॉन चैलेंज के साथ राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया

इसरो के वैज्ञानिकों ने भारत के गगनयान मिशन, मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की दीर्घकालिक योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) रायपुर के सेंटर ऑफ स्पेस एंड इंटरप्लेंट्री एक्सप्लोरेशन (COSINE) ने नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर,इसरो के सहयोग से 13 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के तहत समारोह का आयोजन किया। कार्यक्रम में भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण उपलब्धियों, गगनयान मिशन और मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम पर विशेषज्ञ संवाद एवं तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इसके बाद अंतरिक्ष एवं भू-स्थानिक (Geospatial) प्रौद्योगिकियों के उभरते अनुप्रयोगों आईडियाथान चेलेंज आयोजित किया गया।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CCOST) के कार्यवाहक महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर मुख्य अतिथि तथा इसरो के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर के उप निदेशक श्री राजेंद्रसिंह पी. बयाली विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर इसरो के ग्रुप हेड डॉ. बी एच एम् दारुकेश, एन आई टी रायपुर के प्रभारी निदेशक प्रो. समीर बाजपेयी, COSINE के मेंटर प्रो. एस. सान्याल, संकाय सदस्य, वैज्ञानिक, विद्यार्थी और युवा नवोन्मेषक शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन COSINE के प्रमुख डॉ. सौरभ गुप्ता, NHRC, ISRO की डॉ. जया सक्सेना, COSINE के सदस्य डॉ. हिमांशु गोविल तथा डॉ. कपिल सोनी के मार्गदर्शन में किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जया सक्सेना ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह दिवस भारत की अंतरिक्ष अन्वेषण यात्रा में ऐतिहासिक उपलब्धि चंद्रयान-3 मिशन के दौरान विक्रम लैंडर की सफल सॉफ्ट लैंडिंग की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि युवा प्रतिभाओं को नवोन्मेषक और शोधकर्ता के रूप में विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य अतिथि श्री प्रशांत कविश्वर, कार्यवाहक महानिदेशक, CCOST ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को समाज के और करीब लाने तथा यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में होने वाली प्रगति आम नागरिकों के लिए सुलभ और उपयोगी हो। उन्होंने E = MC² का उदाहरण देते हुए ऊर्जा को युवा मस्तिष्कों और इस अवसर को नवाचार के उत्सव से जोड़ा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति में सार्थक योगदान देने की अपार क्षमता है।

प्रो. समीर बाजपेयी ने ISRO की उपलब्धियों को पूरे देश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विभिन्न इंजीनियरिंग एवं तकनीकी विषयों के एकीकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने आगामी कार्यक्रमों के लिए शुभकामनाएं देते हुए विद्यार्थियों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया।

अपने संबोधन में श्री राजेंद्रसिंह पी. बयाली, उप निदेशक, HSFC, ISRO ने भारत के Human Space Flight Programme और गगनयान मिशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने वर्ष 2018 में कार्यक्रम की घोषणा से लेकर अब तक इसके विकास की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने मानव-रेटेड लॉन्च सिस्टम, अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण, चालक दल की सुरक्षा, माइक्रोग्रैविटी प्रयोगों तथा रिकवरी ऑपरेशन के लिए किए जा रहे व्यापक प्रयासों की जानकारी दी।

उन्होंने अंतरिक्ष यात्रियों के चयन और प्रशिक्षण में भारतीय वायु सेना की भूमिका का उल्लेख किया तथा भारत की दीर्घकालिक योजनाओं, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station) की स्थापना भी शामिल है, पर चर्चा की। उन्होंने गगनयान को एक राष्ट्रीय प्रयास बताते हुए NIT रायपुर के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं से अंतरिक्ष में किए जाने वाले माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान के लिए छोटे, कम ऊर्जा खपत वाले प्रयोग विकसित करने में योगदान देने का आह्वान किया।

डॉ. BHM दारुकेशा, ग्रुप हेड, HSFC, ISRO ने चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग के महत्व को रेखांकित किया और विद्यार्थियों को भारत के तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। अपने विशेषज्ञ व्याख्यान में उन्होंने मानव अंतरिक्ष उड़ान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की, जिनमें लॉन्च व्हीकल की ह्यूमन-रेटिंग, क्रू एस्केप सिस्टम, पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन-समर्थन प्रणाली (Environmental Control and Life Support Systems), कक्षीय संचालन, डी-ऑर्बिटिंग, पैराशूट तैनाती तथा क्रू रिकवरी शामिल हैं। उन्होंने मानव-केंद्रित इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण, मानव कारकों और माइक्रोग्रैविटी में प्रयोगों से जुड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में Biomedical Engineering तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष जोर दिया गया। इसके अंतर्गत क्रू स्वास्थ्य, बायोमेडिकल अनुसंधान, मानव प्रदर्शन, जीवन-समर्थन प्रणालियों तथा माइक्रोग्रैविटी के मानव शरीर पर प्रभावों को समझने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। अंतरिक्ष में हड्डियों के घनत्व में कमी जैसी चुनौतियों और अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्रभावी countermeasures विकसित करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।

उन्होंने माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान के अंतर्गत crystallization और combustion जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया तथा विद्यार्थियों को वैज्ञानिक समस्याओं को ऐसे व्यावहारिक पेलोड में बदलने के लिए प्रेरित किया, जो अंतरिक्ष में उपयोग किए जा सकें और वास्तविक मूल्य उत्पन्न कर सकें।

चर्चा में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की बहुविषयक प्रकृति सामने आई, जिसमें इंजीनियरिंग, Biomedical Engineering, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिमोट सेंसिंग, रोबोटिक्स और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों का समन्वय शामिल है। कार्यक्रम के प्रथम चरण का समापन डॉ. एस. सान्याल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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