- श्री सुनील त्रिपाठी,सहायक संचालक, जनसंपर्क
छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। मंडल के अनुसार, वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक 32 माह में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास कार्यों में तेजी, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। वहीं, वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, सरल विक्रय प्रक्रिया और हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।
32 माह में 7,650 संपत्तियों की बिक्री
मंडल के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक कुल 7,650 संपत्तियां बेची गईं। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत करीब 2,869 संपत्ति रहा।
इसके मुकाबले वर्ष 2019 से 2023 के पांच वर्षों में मंडल ने कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया था। इस अवधि में वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा।
इस तरह वर्तमान अवधि में मंडल का वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय पिछले पांच वर्षों की तुलना में करीब 84 प्रतिशत अधिक रहा।
संपत्ति बिक्री के मूल्य में भी दो गुने से अधिक वृद्धि
मंडल की उपलब्धि केवल बेची गई संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है। संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल ने कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य करीब 603 करोड़ रुपये रहा।
वहीं, वर्ष 2019 से 2023 के बीच पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। उस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य करीब 272.44 करोड़ रुपये था।
इस तुलना के अनुसार, वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक हो गया है।
ओटीएस-2 योजना से 1,584 संपत्तियों का निराकरण
गृह निर्माण मंडल की वन टाइम सेटलमेंट-2 (OTS-2) छूट योजना को भी महत्वपूर्ण परिणाम मिले हैं। मंडल के अनुसार, 1 मार्च 2025 से वर्तमान अवधि तक 1,584 संपत्तियों का विक्रय एवं निराकरण किया गया है।
इन संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 238.67 करोड़ रुपये है।
OTS-2 योजना के माध्यम से लंबे समय से लंबित बकाया मामलों के समाधान का रास्ता आसान हुआ है। इससे हितग्राहियों को अपनी देनदारियों के निपटारे का अवसर मिला है और मंडल की संपत्तियों के बेहतर उपयोग तथा वित्तीय प्रबंधन को भी मजबूती मिली है।
हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था पर जोर
संपत्ति विक्रय में तेजी के पीछे मंडल द्वारा सरल, पारदर्शी और हितग्राही-केंद्रित प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने को महत्वपूर्ण बताया गया है।
आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की बिक्री में प्रक्रिया को आसान बनाने, लंबित मामलों के निराकरण और उपलब्ध संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है। मंडल द्वारा संपत्तियों की मांग, स्थान और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विक्रय व्यवस्था को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।
5 साल बनाम 32 माह: आंकड़ों में प्रदर्शन
मंडल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के दौरान पांच वर्षों में 7,793 संपत्तियां बिकी थीं। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक केवल 32 माह में 7,650 संपत्तियां बेची जा चुकी हैं।
इसी तरह, वर्ष 2019 से 2023 के दौरान संपत्ति विक्रय से 1,362.21 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि वर्तमान 32 माह की अवधि में विक्रय मूल्य 1,609.18 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
प्रमुख आंकड़े
- 2024-अगस्त 2026: 7,650 संपत्तियों का विक्रय
- 2019-2023: 7,793 संपत्तियों का विक्रय
- 2024-अगस्त 2026 में विक्रय मूल्य: 1,609.18 करोड़ रुपये
- 2019-2023 में विक्रय मूल्य: 1,362.21 करोड़ रुपये
- वर्तमान अवधि का वार्षिक औसत विक्रय: करीब 2,869 संपत्तियां
- 2019-2023 का वार्षिक औसत: करीब 1,559 संपत्तियां
- वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में वृद्धि: करीब 84 प्रतिशत
- OTS-2 के तहत निराकरण: 1,584 संपत्तियां
- OTS-2 संपत्तियों का मूल्य: करीब 238.67 करोड़ रुपये
आवास और अधोसंरचना विकास को मिलेगा आधार
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का उद्देश्य प्रदेश में बेहतर आवासीय सुविधाओं के साथ आवासीय एवं अधोसंरचनात्मक विकास को बढ़ावा देना है।
संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विक्रय से मंडल के उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है। साथ ही, इससे भविष्य की आवासीय और विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन उपलब्ध कराने का आधार भी मजबूत हो सकता है।
राज्य सरकार और मंडल की ओर से संपत्ति प्रबंधन, लंबित मामलों के निराकरण, हितग्राहियों को सुविधाजनक सेवाएं और पारदर्शी विक्रय व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। मंडल के अनुसार, आने वाले समय में भी इन व्यवस्थाओं को और मजबूत करते हुए संपत्ति विक्रय तथा आवास एवं अधोसंरचना विकास को गति देने के प्रयास जारी रहेंगे।

