नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने देश के प्रतिष्ठित सिविल सेवा कोचिंग संस्थानों में शामिल वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने पाया कि संस्थान ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2023 के परिणामों को लेकर ऐसे विज्ञापन जारी किए, जिनमें महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर सफलता का भ्रामक चित्र प्रस्तुत किया गया।
यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाना और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
क्या है पूरा मामला?
सीसीपीए के अनुसार, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 के परिणाम घोषित होने के बाद संस्थान ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट और प्रचार सामग्री में कई बड़े दावे किए। इनमें कहा गया कि:
- यूपीएससी 2023 की टॉप-10 रैंक में शामिल 8 उम्मीदवार संस्थान से जुड़े थे।
- टॉप-50 में चयनित 37 अभ्यर्थी वाजीराम एंड रवि के छात्र थे।
- हर वर्ष यूपीएससी के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी संस्थान के छात्र होते हैं।
प्राधिकरण की जांच में पाया गया कि इन दावों को प्रस्तुत करते समय संस्थान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संबंधित सफल अभ्यर्थियों ने संस्थान के कौन-से कोर्स किए थे, उनकी अवधि क्या थी और संस्थान के साथ उनका वास्तविक शैक्षणिक संबंध कितना व्यापक था।
महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप
सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी कोचिंग संस्थान द्वारा सफल उम्मीदवारों की तस्वीरें, रैंक और उपलब्धियों का उपयोग प्रचार के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसके साथ पूरी और पारदर्शी जानकारी देना भी आवश्यक है।
जांच में पाया गया कि विज्ञापनों में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि कई अभ्यर्थियों ने केवल सीमित अवधि के टेस्ट सीरीज, इंटरव्यू गाइडेंस या विशेष मॉड्यूल जैसे पाठ्यक्रमों में भाग लिया था। ऐसी जानकारी छिपाकर संस्थान ने यह धारणा बनाने की कोशिश की कि उम्मीदवारों की सफलता पूरी तरह संस्थान के नियमित कोर्स का परिणाम थी।
उपभोक्ताओं को गुमराह करने की आशंका
प्राधिकरण का मानना है कि इस प्रकार के विज्ञापन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को प्रभावित कर सकते हैं। जब सफलता के दावों को पूर्ण संदर्भ के बिना प्रस्तुत किया जाता है, तो संभावित छात्र किसी संस्थान की वास्तविक उपलब्धियों के बारे में गलत निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
सीसीपीए ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और तथ्यात्मक जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि छात्र अपने करियर और भविष्य से जुड़े निर्णय इन्हीं दावों के आधार पर लेते हैं।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई
मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने माना कि संस्थान द्वारा किए गए प्रचार में महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा नहीं किया गया, जिससे विज्ञापन भ्रामक श्रेणी में आते हैं। इसी आधार पर संस्थान पर 7 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया।
कोचिंग उद्योग के लिए संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे कोचिंग उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। अब संस्थानों को अपने विज्ञापनों में सफलता दर, चयनित अभ्यर्थियों और कोर्स संबंधी दावों को पूरी पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत करना होगा। अन्यथा उन्हें भी नियामकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

