आलेखः एफटीए विकसित भारत के लिए नई व्यापार संरचना का निर्माण कर रहे हैं

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  • लेखक: राजेश अग्रवाल, वाणिज्य मंत्रालय के सचिव हैं।

भारत ने वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अगले दो दशकों तक उच्च आर्थिक विकास दर बनाए रखना आवश्यक होगा। हालांकि भारत का विशाल घरेलू बाजार विकास का एक मजबूत आधार है, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने और तकनीकी रूपांतरण को गति देने के लिए दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के साथ गहरा आर्थिक एकीकरण भी उतना ही जरूरी है।

इसी दिशा में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारत की आर्थिक रणनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरे हैं। ये समझौते केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश, रोजगार, तकनीक, सेवाओं और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी को भी मजबूत कर रहे हैं।

एफटीए से खुल रहे वैश्विक अवसर

मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से भारतीय उत्पादों और सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच मिल रही है। इससे भारतीय उद्योगों को निर्यात बढ़ाने, उत्पादन क्षमता का विस्तार करने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है।इसका लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), किसान, मछुआरे और युवा पेशेवर भी इन समझौतों के जरिए वैश्विक अवसरों से जुड़ रहे हैं।

प्रमुख बाजारों तक पहुंच पर फोकस

भारत की नई व्यापार रणनीति उन देशों और आर्थिक समूहों पर केंद्रित है, जहां भारतीय निर्यात की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में भारतीय उत्पादों को समान अवसर दिलाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।विशेष रूप से वस्त्र, परिधान और जूता उद्योग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को एफटीए से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इन क्षेत्रों में भारतीय उत्पाद लंबे समय से उच्च आयात शुल्क की चुनौती का सामना कर रहे हैं।

सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

भारत की ताकत केवल विनिर्माण तक सीमित नहीं है। सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सेवाएं और वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) देश की आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण स्रोत बन चुके हैं।नए एफटीए में डिजिटल सेवाओं, डेटा आधारित कारोबार और सीमा-पार सेवा प्रदायगी को विशेष महत्व दिया गया है। इससे भारतीय आईटी कंपनियों, तकनीकी स्टार्टअप्स और डिजिटल उद्यमों को वैश्विक स्तर पर विस्तार के नए अवसर मिल रहे हैं।

युवाओं और पेशेवरों के लिए नए रास्ते

हाल के व्यापार समझौतों में भारतीय छात्रों और पेशेवरों की अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को भी प्राथमिकता दी गई है। कई समझौतों में रोजगार, अध्ययन और अस्थायी कार्य से जुड़े विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं।भारत-ब्रिटेन दोहरा योगदान समझौता (Double Contribution Convention) जैसे प्रावधान भारतीय पेशेवरों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा कराधान से राहत प्रदान करते हैं। इससे विदेशों में कार्यरत भारतीयों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।

निवेश और रोजगार सृजन को मिल रही गति

नई पीढ़ी के एफटीए केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश आकर्षित करने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।भारत-ईएफटीए समझौता इसका प्रमुख उदाहरण है, जिसके तहत ईएफटीए देशों ने भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे प्रावधान भारत को वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद कर रहे हैं।

आधुनिक व्यापार की नई चुनौतियों का समाधान

आज व्यापार केवल आयात-निर्यात शुल्क तक सीमित नहीं है। उत्पाद गुणवत्ता मानक, तकनीकी नियम, पर्यावरणीय आवश्यकताएं और स्वास्थ्य संबंधी मानक भी वैश्विक व्यापार को प्रभावित करते हैं।भारत के नए एफटीए इन मुद्दों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। नियामकीय सहयोग और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार तक पहुंच की बाधाओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

घरेलू हितों की सुरक्षा भी प्राथमिकता

सरकार का कहना है कि एफटीए तैयार करते समय घरेलू उद्योगों, किसानों और एमएसएमई हितों का विशेष ध्यान रखा जाता है। संवेदनशील क्षेत्रों को आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाती है और बाजार उदारीकरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाता है।कृषि सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों को विशेष संरक्षण दिया गया है ताकि आयात प्रतिस्पर्धा का नकारात्मक प्रभाव घरेलू उत्पादकों पर न पड़े।

विकसित भारत के लिए नई व्यापार संरचना

भारत की एफटीए नीति अब केवल व्यापारिक समझौतों का समूह नहीं रह गई है, बल्कि यह विकसित भारत की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है। इन समझौतों के जरिए भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, निवेश प्रवाह, तकनीकी सहयोग और रोजगार सृजन के नए अवसरों से जुड़ रहा है।

यदि इन समझौतों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में एफटीए भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने और 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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