जेल की सजा बढ़ेगी, जुर्माना 50 लाख तक, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में तय समय सीमा में होगी सुनवाई
नई दिल्ली.देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों के बीच केंद्र सरकार अब सख्त रुख अपनाने जा रही है। लोकसभा में मंगलवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा शुरू हुई। इस बिल का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करना और युवाओं का भरोसा बहाल करना है।
सरकार ने इस संशोधन को एक बड़े सुधार के रूप में पेश किया है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं को रोकने और जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सजा और जुर्माने में बड़ा इजाफा
प्रस्तावित संशोधन के तहत अब पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों में शामिल दोषियों को कम से कम 5 साल की सजा (पहले 3 साल) दी जाएगी, जो बढ़कर 10 साल तक जा सकती है। जुर्माने की राशि भी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए तक कर दी गई है।
सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी सख्ती
परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों या सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी कड़ा शिकंजा कसा जाएगा। पहले जहां अधिकतम 1 करोड़ रुपए का जुर्माना था, उसे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा रहा है। साथ ही, ऐसी एजेंसियों को 8 साल तक परीक्षा आयोजन से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
संगठित अपराध पर और कड़ी सजा
यदि पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी किसी संगठित गिरोह द्वारा की जाती है, तो न्यूनतम सजा 7 साल होगी और इसके साथ 10 करोड़ रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
फास्ट-ट्रैक जांच और सुनवाई
बिल में सबसे अहम प्रावधान मामलों के त्वरित निपटारे का है। केंद्र सरकार द्वारा मामला सौंपे जाने के दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। इसके अलावा, चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमा निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।
सरकार की मंशा साफ
प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह संशोधन छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने इसे मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
2024 के कानून में हो रहा संशोधन
गौरतलब है कि मूल कानून 2024 में लागू किया गया था, जिसमें 15 प्रकार के अपराधों को परिभाषित किया गया था। इनमें पेपर लीक, फर्जी वेबसाइट, और परीक्षा में अनुचित मदद जैसे अपराध शामिल थे। सभी अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाया गया था।
निष्कर्ष
नया संशोधन कानून केवल सजा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका फोकस परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना भी है। यदि यह बिल पारित होता है, तो पेपर लीक जैसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है।

