नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल स्वतंत्रता का उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि अपने सपनों, संकल्प और सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ने का दिन है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों और महान क्रांतिकारियों को नमन किया। उन्होंने हाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरा देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने आज एक बहुत बड़े सपने की कल्पना की है। जब देश आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के परिश्रम और सामूहिक संकल्प के बल पर 2047 तक विकसित भारत का सपना निश्चित रूप से पूरा किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े सपने और मजबूत संकल्प देश की क्षमताओं को भी नई ऊंचाई देते हैं।
भारत ने हासिल की नई गति
प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि 25 करोड़ नागरिक गरीबी से बाहर आए हैं और भारत ‘फ्रैजाइल फाइव’ से निकलकर दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारत ने नई गति पकड़ी है और 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य को रोकना अब असंभव है।
रक्षा उत्पादन से मोबाइल निर्माण तक बढ़ी ताकत
प्रधानमंत्री ने देश की उत्पादन क्षमता में हुई वृद्धि का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन में लगभग चार गुना, खादी और ग्रामोद्योग में पांच गुना तथा इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में करीब सात गुना वृद्धि हुई है।
रेलवे कोच उत्पादन में 21 गुना और मोबाइल फोन निर्माण में 33 गुना वृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब उत्पादन और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
डिजिटल क्षेत्र में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या चार गुना बढ़ी है, पेटेंट अनुदान में चार गुना वृद्धि हुई है और डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा है।
‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ पर जोर
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए कहा कि देश को अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना चाहिए और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर गर्व महसूस करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को देशवासी अपना रहे हैं। भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए लागत, गुणवत्ता और व्यापकता पर विशेष ध्यान देना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय कारखानों को प्रतिस्पर्धी बनाना होगा, उत्पाद उपयोगकर्ता के अनुकूल होने चाहिए और पैकेजिंग भी विश्वस्तरीय होनी चाहिए।
सेमीकंडक्टर में भारत की बड़ी छलांग
प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में तीन घरेलू सेमीकंडक्टर संयंत्र पहले से ही काम कर रहे हैं और वैश्विक बाजारों में चिप्स का निर्यात किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले एक से दो वर्षों में 7 से 8 नई सेमीकंडक्टर उत्पादन सुविधाएं शुरू होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत से विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
‘नो-गो एरिया’ अब ‘गो-अहेड एरिया’
प्रधानमंत्री ने देश के उन क्षेत्रों का भी उल्लेख किया, जिन्हें कभी ‘नो-गो एरिया’ माना जाता था। उन्होंने कहा कि आज ऐसे क्षेत्रों में शांति, विकास और नई उम्मीद दिखाई दे रही है।
नक्सली हिंसा से प्रभावित इलाकों में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां कभी भय और हिंसा का वातावरण था, वहां अब विकास की नई संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।
लोकतंत्र और संविधान भारत की ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास स्थिर राजनीतिक जनादेश, स्थिर सरकार, जीवंत लोकतंत्र, मजबूत न्यायिक प्रणाली और ऐसा संविधान है जो सभी का मार्गदर्शन करता है। उन्होंने कहा कि इन संस्थागत ताकतों के आधार पर भारत आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में देश की सात प्रमुख धाराएं—सप्तधाराएं—भारत को नई दिशा और नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।
उन्होंने देशवासियों से बड़े सपने देखने, मजबूत संकल्प लेने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

