तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कथित निधन के बाद राजधानी तेहरान में उनकी अंतिम यात्रा की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 3 जुलाई से शुरू हुए इस कार्यक्रम में उनके पार्थिव शरीर को तेहरान की ग्रैंड मोसाला मस्जिद में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है।
मीडिया जानकारी के अनुसार, खामेनेई के साथ उनकी पत्नी, बेटी, दामाद और 14 महीने की पोती के पार्थिव शरीर भी अंतिम संस्कार स्थल पर रखे गए हैं। यहां आम नागरिकों के साथ-साथ 100 से अधिक देशों के विदेशी प्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। पूरे परिसर में शोक और सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिल रहे हैं।
दरअसल, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की छह दिवसीय अंतिम यात्रा शनिवार से शुरू हो गई। फरवरी में अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले में उनकी मौत के बाद सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार को टाल दिया गया था। अब युद्धविराम लागू होने के बाद तेहरान से शुरू हुई अंतिम यात्रा ईरान और इराक के प्रमुख धार्मिक शहरों से होकर 9 जुलाई को मशहद में दफन के साथ संपन्न होगी। इस दौरान लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।
अंतिम यात्रा में कई देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अंतिम विदाई समारोह में हिस्सा लिया।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान को बड़ा झटका लगा है और मानवीय आधार पर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। ट्रंप ने कहा कि ईरान अब वार्ता चाहता है और समझौते के लिए तैयार दिखाई दे रहा है।
ईरान ने अंतिम यात्रा की शुरुआत 4 जुलाई को की, जो अमेरिका के स्थापना दिवस की 250वीं वर्षगांठ के साथ मेल खाती है। तेहरान में आयोजित समारोह के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए। ईरानी नेतृत्व ने इस अंतिम यात्रा को राष्ट्रीय एकता, प्रतिरोध और शहीद नेता को श्रद्धांजलि का प्रतीक बताया है।

