रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बस्तर अब विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है और केंद्र तथा राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से इसे देश का सबसे सुंदर एवं विकसित आदिवासी संभाग बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री शनिवार को रायपुर में आयोजित ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शशांक शर्मा, पांचजन्य के संपादक हितेश शंकर सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। सरकार बस्तर में आधारभूत सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका के क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल की है। सुरक्षा बलों, आम जनता, पत्रकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों के सामूहिक प्रयासों ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने पुस्तक के लेखकों राजीव रंजन प्रसाद और रचना नायडू की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक माओवादी हिंसा के दौर और उससे मुक्ति के संघर्ष का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। आने वाली पीढ़ियों को इससे यह समझने का अवसर मिलेगा कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती और लोकतांत्रिक मूल्यों के माध्यम से ही समाज का विकास संभव है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक के लिए किए गए शोध में यह सामने आया कि बड़ी संख्या में नक्सली कैडर अशिक्षित या अल्पशिक्षित थे। जिस उम्र में उनके हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए थीं, उस उम्र में उन्हें हथियार थमा दिए गए। माओवाद ने एक पूरी पीढ़ी को शिक्षा और विकास से दूर रखा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ‘बस्तर रोडमैप 2.0’ के तहत विकास कार्यों को गति दे रही है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना और ‘बस्तर मुन्ने’ अभियान के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। सुरक्षा कैंपों को अब सेवा डेरे के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां कौशल विकास, उद्यमिता और शासकीय सेवाओं की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में बस्तर की लगभग 85 प्रतिशत आबादी की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। सरकार अगले तीन वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। कृषि के साथ पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय परिवारों को गाय और भैंस उपलब्ध कराने की योजना भी बनाई गई है।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत लाखों लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। बंद पड़े 421 स्कूलों को फिर से शुरू किया गया है तथा अबूझमाड़ और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में कार्य जारी है।
उन्होंने कहा कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार बैराज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। वहीं, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ वर्षों के शोध और मैदानी अध्ययन का परिणाम है। यह पुस्तक बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर, आत्मसमर्पित नक्सलियों से बातचीत कर और वास्तविक परिस्थितियों को समझकर तैयार की गई है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि माओवाद किसी आर्थिक आवश्यकता से नहीं बल्कि एक विचारधारा के रूप में आया था, जिसका उद्देश्य बंदूक के बल पर सत्ता स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में शांति लौट रही है, मेले-मड़ई, साप्ताहिक बाजार और धार्मिक गतिविधियां फिर से सक्रिय हो रही हैं तथा सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए व्यापक प्रयास कर रही है।

