वॉशिंगटन/बेरूत। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि हिजबुल्ला इस्राइल के साथ युद्धविराम (सीजफायर) स्थापित करने के प्रयासों में बाधा डाल रहा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि संगठन हमले रोकने को तैयार नहीं है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशें प्रभावित हो रही हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने हाल ही में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग-अलग बातचीत की। यह वार्ता इस्राइल और लेबनान के बीच तनाव कम करने और संघर्ष विराम की दिशा में चल रहे कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा थी।
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिका ने दोनों पक्षों के सामने एक स्पष्ट प्रस्ताव रखा था। इस योजना के तहत पहले हिजबुल्ला को इस्राइल पर सभी हमले रोकने थे। इसके बदले में इस्राइल बेरूत में किसी नई सैन्य कार्रवाई से परहेज करता। अमेरिका का मानना था कि इस कदम से तनाव कम करने और संघर्ष समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता था।
अधिकारी ने बताया कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने के पक्ष में थे। हालांकि, यह प्रक्रिया तब अटक गई जब लेबनान की संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी की प्रतिक्रिया सामने आई। बेरी को हिजबुल्ला का करीबी सहयोगी माना जाता है।
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, नबीह बेरी ने कहा कि वे हिजबुल्ला की ओर से युद्धविराम का आश्वासन दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए पहले इस्राइल को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी। इस शर्त के कारण वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।
अमेरिका ने इस पूरे संघर्ष में ईरान की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। अधिकारी ने आरोप लगाया कि ईरान हिजबुल्ला को निर्देश दे रहा है और वह लेबनान के हितों की बजाय क्षेत्रीय रणनीतिक उद्देश्यों को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ईरान चाहता है कि संघर्ष लंबा चले ताकि बाद में वह स्थिति को नियंत्रित करने का श्रेय ले सके।
क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की यह टिप्पणी पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और कूटनीतिक प्रयासों को लेकर नई बहस छेड़ सकती है।

