नई दिल्ली। संसद में लंबे समय से अटके लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक, 2026 को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की सक्रिय पहल और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच लगातार संवाद के बाद सभी दल इस अहम विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार हो गए हैं।
संसदीय सूत्रों के मुताबिक, अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न दलों के नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके हस्तक्षेप के बाद यह तय हुआ कि देश के करोड़ों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की साख से जुड़े इस मुद्दे पर सदन में गंभीर और व्यापक बहस कराई जाएगी।
मंगलवार को लोकसभा में इस विधेयक पर करीब 10 घंटे चर्चा निर्धारित की गई है। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी राय रखेंगे। विपक्ष की ओर से कुल 93 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, जिन पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
सदन में चर्चा पूरी होने के बाद सरकार सभी सुझावों और संशोधनों पर जवाब देगी। इसके पश्चात विधेयक को पारित करने के लिए सदन के समक्ष रखा जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि व्यापक चर्चा के बाद इस महत्वपूर्ण विधेयक को मंजूरी मिल जाएगी।
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल, संगठित परीक्षा माफिया और तकनीकी गड़बड़ियों जैसी समस्याओं पर सख्त अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी.

